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पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की मौजूदगी और प्राइवेट प्रैक्टिस पर स्वास्थ्य मंत्री का बड़ा बयान, बोले-आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों का इलाज जरुरी

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की ड्यूटी और प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों. . .

कोलकाता। पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की ड्यूटी और प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों से सप्ताह में कम से कम 96 घंटे अपने कार्यस्थल (स्टेशन) पर मौजूद रहने का अनुरोध किया गया है, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।

96 घंटे की मौजूदगी पर क्या कहा स्वास्थ्य मंत्री?

डॉ. शारद्वत मुखर्जी ने सोशल मीडिया पर जारी स्पष्टीकरण में बताया कि 96 घंटे स्टेशन पर रहने की बात कोई सरकारी आदेश नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया गया एक सहयोगात्मक अनुरोध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ 96 घंटे लगातार ड्यूटी करना नहीं है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों से केवल इतना अपेक्षित है कि वे अपनी पोस्टिंग वाले जिले में अधिक समय बिताएं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मरीजों की देखभाल कर सकें।

’96 घंटे लगातार काम’ की बात गलत

एक इंटरव्यू में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार किसी भी डॉक्टर से 96 घंटे लगातार काम करने की अपेक्षा नहीं करती। उनका कहना था कि कई डॉक्टर सप्ताह में दो-तीन दिन ही जिला अस्पताल में रहते हैं और फिर कोलकाता लौट जाते हैं, जिससे ग्रामीण और जिला स्तर के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

ड्यूटी के दौरान प्राइवेट प्रैक्टिस पर सख्त रुख

स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो डॉक्टर नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) नहीं लेते हैं, उन्हें निजी प्रैक्टिस करने का अधिकार है। हालांकि, यह प्राइवेट प्रैक्टिस सरकारी अस्पताल के ड्यूटी समय के दौरान किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी चिंता जताई कि कुछ वरिष्ठ डॉक्टर और प्रोफेसर सरकारी अस्पतालों की बजाय निजी नर्सिंग होम में अधिक समय देते हैं, जिसके कारण गरीब मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है।

IMA ने नियमों के पालन का किया समर्थन

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के सचिव डॉ. शांतनु सेन ने कहा कि उन्होंने इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश नहीं देखा है। हालांकि, उन्होंने माना कि कुछ सरकारी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी तरह पालन नहीं करते। उन्होंने कहा कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन डॉक्टरों पर अतिरिक्त कार्यभार भी नहीं डाला जाना चाहिए।

NMO ने प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक का किया स्वागत

राष्ट्रवादी चिकित्सक संगठन (NMO) के सचिव डॉ. अर्णब पाल ने ड्यूटी के दौरान प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने की पहल का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने 96 घंटे स्टेशन पर रहने के सुझाव पर मानवीय दृष्टिकोण से पुनर्विचार करने की मांग की।

AHSD ने पोस्टिंग व्यवस्था पर उठाए सवाल

एसोसिएशन ऑफ हेल्थ सर्विस डॉक्टर्स (AHSD) के सचिव डॉ. उत्पल बंद्योपाध्याय ने कहा कि अधिकांश सरकारी डॉक्टर ईमानदारी से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके अनुसार, पिछले वर्षों में हुए दंडात्मक तबादलों के कारण कई डॉक्टर अपने परिवार और गृह जिले से दूर कार्यरत हैं। यदि पोस्टिंग की समस्या का समाधान हो जाए, तो इस तरह के विवाद काफी हद तक समाप्त हो सकते हैं।

संवाद के लिए खुले हैं स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यदि किसी भी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी को इस विषय में कोई भ्रम या सवाल है, तो वे सीधे उनसे संपर्क कर स्पष्टीकरण प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार का उद्देश्य डॉक्टरों पर दबाव बनाना नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और मरीजों के लिए सुलभ बनाना है

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