काकद्वीप । कई दिनों की चिंता, प्रार्थना और उम्मीद के बाद आखिरकार बंगाल की खाड़ी में लापता हुए दीघा के शंकरपुर मछली बंदरगाह से निकले ‘जय मां काली’ ट्रॉलर का पता चल गया। हालांकि, ट्रॉलर मिलने के साथ ही एक दर्दनाक सच्चाई भी सामने आई। अब तक 9 मछुआरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 6 मछुआरे अब भी लापता हैं। उनकी तलाश के लिए बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान जारी है।
2 जुलाई को मछली पकड़ने निकला था ट्रॉलर
जानकारी के अनुसार, 2 जुलाई को पूर्व मेदिनीपुर के शंकरपुर मछली बंदरगाह से ‘जय मां काली’ ट्रॉलर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए रवाना हुआ था। शुरुआती कुछ दिनों तक ट्रॉलर का तटीय क्षेत्र से नियमित संपर्क बना रहा, लेकिन 5 जुलाई के बाद अचानक संपर्क टूट गया। इसके बाद परिजनों की चिंता बढ़ गई और सभी अपने प्रियजनों के सुरक्षित लौटने की उम्मीद में बंदरगाह पर इंतजार करते रहे।
संयुक्त अभियान के बाद मिला ट्रॉलर
ट्रॉलर के लापता होने की सूचना मिलते ही भारतीय तटरक्षक बल (कोस्ट गार्ड), नौसेना, वन विभाग, सुंदरबन पुलिस, गोबर्धनपुर कोस्टल थाना और विभिन्न मछुआरा संगठनों ने संयुक्त रूप से खोज अभियान शुरू किया। खराब मौसम, ऊंची लहरों और विशाल समुद्री क्षेत्र के बावजूद लगातार तलाश जारी रही।
बाघेरचर इलाके में उल्टी अवस्था में मिला ट्रॉलर
शनिवार से सुंदरबन टाइगर रिजर्व के डिप्टी फील्ड डायरेक्टर चित्रक भट्टाचार्य के नेतृत्व में अभियान को और तेज किया गया। रविवार दोपहर दक्षिण 24 परगना के बकखाली तट से लगभग 35 किलोमीटर दूर चुलकाठी जंगल के पास बाघेरचर इलाके में ट्रॉलर उल्टी अवस्था में मिला। इसके बाद दूसरे ट्रॉलर की मदद से क्षतिग्रस्त नाव को खींचकर पाथरप्रतिमा के गोबर्धनपुर स्थित सीतारामपुर घाट लाया गया, जहां देर शाम विस्तृत तलाशी अभियान शुरू हुआ।
पानी निकालते ही मिले एक के बाद एक शव
सबसे पहले ट्रॉलर के इंजन में फंसे एक मछुआरे का शव बरामद हुआ। इसके बाद ट्रॉलर में भरे पानी को शक्तिशाली पंपों से बाहर निकाला गया। जैसे-जैसे पानी कम होता गया, अंदर से एक-एक कर शव मिलने लगे। पहले पांच शव मिले, फिर चार और शव बरामद हुए। इस तरह मृतकों की संख्या बढ़कर 9 हो गई। प्रशासन को आशंका है कि ट्रॉलर के भीतर या दुर्घटनास्थल के आसपास अभी भी अन्य मछुआरे हो सकते हैं। इसलिए पूरे क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान जारी है।
6 मछुआरों की तलाश जारी
काकद्वीप मछुआरा ट्रॉलर मालिक एसोसिएशन के अध्यक्ष बिजन माइती ने बताया कि अब तक 9 शव बरामद किए जा चुके हैं। मृतकों में 3 मछुआरे ओडिशा के निवासी हैं, जबकि बाकी पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के शंकरपुर और आसपास के क्षेत्रों के रहने वाले हैं। शेष 6 लापता मछुआरों की तलाश के लिए कोस्ट गार्ड, वन विभाग और सुंदरबन पुलिस संयुक्त अभियान चला रहे हैं।
घाट पर उमड़े परिजन, पहचान की प्रक्रिया जारी
ट्रॉलर मिलने की खबर फैलते ही शंकरपुर, फ्रेजरगंज और सीतारामपुर घाट पर बड़ी संख्या में लापता मछुआरों के परिजन पहुंच गए। बरामद शवों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। कई परिवार अब भी इस उम्मीद में हैं कि उनके प्रियजन सुरक्षित मिल जाएं।
सरकार ने सहायता का दिया भरोसा
सुंदरबन विकास मंत्री दीपंकर जना ने कहा कि हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, वन विभाग और प्रशासन की विभिन्न एजेंसियों को तत्काल बचाव अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए थे। ट्रॉलर में भारी मात्रा में पानी भरा होने के कारण राहत कार्य में कठिनाई आ रही थी, लेकिन पानी निकालने के बाद लगातार शव बरामद हुए।उन्होंने कहा कि लापता मछुआरों की तलाश तब तक जारी रहेगी जब तक सभी का पता नहीं चल जाता। साथ ही राज्य सरकार मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी है और प्रभावित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
समुद्र में मछुआरों की जिंदगी के जोखिम की फिर याद दिलाई दुर्घटना
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि समुद्र में रोजी-रोटी की तलाश में जाने वाले मछुआरों का जीवन कितना कठिन और जोखिमभरा होता है। सीतारामपुर घाट सहित पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है, जबकि लापता मछुआरों के परिजन अब भी किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए हुए हैं।