कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद ममता बनर्जी के बुरे दिन शुरू हो ग। अब जो हालात वहां बनते नजर आ रहे हैं, उनसे लगता है कि तृणमूल कांग्रेस दो गुटों में बंट जाएगी। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तेज हलचल मची हुई है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस अब अपने सबसे गंभीर संकट का सामना करती नजर आ रही है। पार्टी के भीतर असंतोष, बागी नेताओं की सक्रियता और कुछ विधायकों की सीक्रेट बैठकों ने राजनीतिक गलियारों में इस चर्चा को हवा दे दी है कि कहीं बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक घटनाक्रम तो नहीं दोहराया जाने वाला है
ऋतब्रत बन सकते हैं बंगाल के शिंदे
कल टीएमसी ने ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को सस्पेंड किया था। अब ऐसी चर्चा है कि इन दो निष्कासित विधायकों में से ऋतब्रत बनर्जी तृणमूल के नए शिंदे बन सकते हैं। जिस तरह से एकनाथ शिंदे ने 40 विधायकों को लेकर अलग पार्टी बना ली थी, उसी तरह ऋतब्रत बनर्जी भी नई पार्टी बना सकते हैं। सूत्रों के मुातबिक ऋतब्रत बनर्जी भी कुछ ऐसी ही कोशिश में हैं। यही वजह है कि ऋतब्रत बनर्जी और उनके साथ साथ संदीप साहा ने पार्टी मीटिंग में जाना बंद कर दिया था।
‘असली तृणमूल’ बनाने की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने हाल के दिनों में कोलकाता के विधायक हॉस्टल में कई बैठकें की हैं। इन बैठकों में टीएमसी के भविष्य, संगठनात्मक बदलाव और कथित तौर पर एक नए राजनीतिक विकल्प पर चर्चा होने की बात कही जा रही है। टीएमसी के करीब 15 से 20 विधायक ऐसे नेताओं के संपर्क में हैं, जो पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। खबर है कि ये असंतुष्ट नेता ‘असली तृणमूल’ के नाम से अलग राजनीतिक मंच बनाने की तैयारी कर रहे हैं। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने भी पार्टी पर आए इस खतरे को पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
दो विधायकों के निष्कासन से बढ़ी हलचल
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब टीएमसी नेतृत्व ने उलुबेरिया पूर्व से विधायक ऋतब्रत बनर्जी और एंटाली के विधायक संदीपन साहा को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित कर दिया। दोनों विधायकों ने नेता प्रतिपक्ष से जुड़े प्रस्ताव और हस्ताक्षर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद जब दोनों विधायकों को पार्टी मीटिंग में बुलाया गया तो वो वहां नहीं पहुंचे।
TMC की मीटिंग में पहुंचे सिर्फ 20 विधायक
हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में हार के बाद से TMC के अंदर नाराजगी और फूट दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि नेताओं का गुस्सा पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी पर है, न कि पार्टी नेता ममता बनर्जी पर। रविवार को यह मतभेद तब साफ हो गया जब TMC के 80 में से 60 MLA ममता बनर्जी के घर पर बुलाई गई मीटिंग में शामिल नहीं हुए।
अभिषेक बनर्जी पर क्यों भड़के विधायक?
टीएमसी से निकाले गए विधायक संदीपन साहा ने इस मामले के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि पार्टी के जनरल सेक्रेटरी ने ही MLA की लिस्ट पर साइन किए थे। एनडीटीवी ने सूत्रों के हवाले से बताया कि नाराज टीएमसी विधायकों को मनाने के लिए और सदन में पार्टी को एकजुट बनाए रखने के लिए कोलकाता में जोरदार मीटिंग चल रही हैं। अब देखना होगा कि ममता बनर्जी टीएमसी को किस तरह एकजुट रख पाएंगी.
फर्जी हस्ताक्षर मामले की CID जांच
फर्जी साइन का मामला सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल CID ने जांच शुरू कर दी है. इस मामले में कई तृणमूल नेताओं को नोटिस भेजा गया है.CID ने अभिषेक बनर्जी को पूछताछ के लिए बुलाया भी था. हालांकि वह सीआईडी के समन पर नहीं गए थे.
चुनाव हारने के बाद से टीएमसी अपने नेताओं को एकजुट रखने के लिए संघर्ष कर रही है. ममता बनर्जी की कुर्सी जाने के बाद कई नेताओं ने खुलकर नाराजगी जाहिर की है.पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने तो जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है.
बीजेपी ने कसा टीएमसी पर तंज
तृणमूल कांग्रेस के हालात पर मजाक उड़ाते हुए सीनियर BJP नेता और शुभेंदु सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने कहा, ‘सभी लोग पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, लग रहा है कि अब केवल ममता बनर्जी और उनके भतीजे ही पार्टी (टीएमसी) में बचेंगे.’