नई दिल्ली। अयोध्या के प्रसिद्ध श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे (दान) में कथित हेराफेरी और चोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। देश की शीर्ष अदालत ने इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। इसके साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले से जुड़ी विभिन्न जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश और टिप्पणियां
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कई अहम निर्देश दिए हैं:
- SIT की संरचना और स्टेटस रिपोर्ट: कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित SIT को अब तक की जांच की प्रगति रिपोर्ट (Status Report) सौंपने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने विशेष रूप से पूछा है कि इस जांच दल में कौन-कौन अधिकारी शामिल हैं और इसकी संरचना (Composition) क्या है।
- साक्ष्यों और CCTV की सुरक्षा: याचिकाकर्ताओं द्वारा यह आशंका जताए जाने पर कि मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं, कोर्ट ने संज्ञान लिया। याचिका में मांग की गई थी कि मंदिर परिसर और कैश काउंटिंग रूम के सभी CCTV फुटेज और डिजिटल लॉग्स को सुरक्षित रखा जाए।
- सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट: सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वे जल्द ही इस मामले की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
याचिकाओं में क्या है मांग? (CBI जांच और CAG ऑडिट)
सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिकाओं (जिनमें नरेंद्र कुमार गोस्वामी, अधिवक्ता अजय कुमार राय, दिनेश कुमार यादव और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह की याचिकाएं शामिल हैं) में निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
- निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच: वर्तमान SIT जांच के बजाय पूरे मामले की कोर्ट की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) या किसी स्वतंत्र एजेंसी से समयबद्ध जांच कराई जाए।
- CAG से फॉरेंसिक ऑडिट: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले शुरुआती दान से लेकर अब तक के पूरे वित्तीय लेखा-जोखा का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से फॉरेंसिक ऑडिट कराया जाए।
- पारदर्शिता के लिए राष्ट्रीय गाइडलाइन: देश के बड़े धार्मिक स्थलों पर मिलने वाले चढ़ावे की गिनती, सुरक्षा, और ऑडिट के धर्मनिरपेक्ष प्रबंधन के लिए एक ‘नेशनल मिनिमम टेम्पल डोनेशन ट्रांसपेरेंसी’ फ्रेमवर्क बनाया जाए।
क्या है पूरा मामला? (SIT की शुरुआती रिपोर्ट में खुलासे)
राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT (जिसमें लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं) का गठन किया था।
SIT की शुरुआती जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे बेहद चौंकाने वाली हैं:
- 70 संदिग्ध घटनाएं: 27 अप्रैल से 5 जून के बीच कैश काउंटिंग रूम के CCTV फुटेज की जांच में लगभग 70 ऐसी संदिग्ध घटनाएं देखी गईं, जहां पैसे गिनने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियों को अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते नजर आए।
- सुरक्षा में भारी चूक: रिपोर्ट के अनुसार, काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले कर्मचारियों की कोई मेटल डिटेक्टर या शारीरिक चेकिंग (Frisking) नहीं होती थी। साथ ही दान पेटियों (हुंडियों) की चाबियां बिना किसी लिखित अधिकार के कुछ खास लोगों के पास थीं।
- लाखों की बरामदगी: जांच के दौरान कुछ कर्मचारियों से ₹78.94 लाख और काउंटिंग रूम से जुड़े एक टॉयलेट से ₹2.25 लाख की नकदी बरामद की जा चुकी है। इस मामले में अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।
- ट्रस्ट में प्रशासनिक फेरबदल: इस विवाद के बढ़ने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट की बैठकों में कुछ कड़े फैसले लिए गए, जिसके तहत कई अधिकारियों की भूमिकाओं की समीक्षा की जा रही है। हालांकि, SIT ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर चल रही चांदी की ईंटें या अन्य मूल्यवान वस्तुएं गायब होने की अफवाहें निराधार हैं।
अगली सुनवाई 20 जुलाई को
सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई की तारीख तय की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि चूंकि यह एक जारी जांच (Ongoing Investigation) है, इसलिए वे फिलहाल स्टेटस रिपोर्ट की कॉपी याचिकाकर्ताओं को सौंपने का आदेश नहीं दे रहे हैं, लेकिन अगली तारीख पर वे पूरी जांच रिपोर्ट की समीक्षा करेंगे।