धार । भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार अदालत ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने जैन समाज और मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह निर्णय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिस पर अदालत ने भरोसा जताया है। भोजशाला मामले में अदालत के फैसले ने परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी है। धार में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं।
अदालत ने क्या-क्या कहा?
अदालत ने मुस्लिम पक्ष के लिए कहा कि वो मस्जिद की जमीन के लिए आवेदन कर सकता है। हाई कोर्ट ने कहा कि एएसआई अधिनियम के वैधानिक प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले में स्थापित मिसाल के आधार पर और पुरातात्विक साक्ष्यों की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय एएसआई द्वारा किए गए ऐसे बहु-विषयक अध्ययनों के निष्कर्षों और भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों पर सुरक्षित रूप से भरोसा कर सकता है।
शांतिपूर्ण तरीके से अदा की गई नमाज
अदालत का ये फैसला ऐसे समय आया है जब धार में नमाज अदा की जा रही थी। बता दें कि आज शुक्रवार का दिन है। तय नियम के अनुसार शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय भोजशाला में नमाज़ अदा करता है. भारी सुरक्षा में बीच आज शांति पूर्ण तरीके से नमाज अदा की गई।
फैसले से पहले शहर के नाकों पर नाकाबंदी की गई थी। सोशल मीडिया पर नजर रखी जा रही है। लगभग 1000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। अराजक तत्वों को गिरफ्तार भी किया गया है। अदालत के फैसले का पूरा सम्मान हो, इसके लिए दोनों पक्षों से लगातार चर्चा की गई।
सर्वे में क्या हुआ और कितने दिन चला?
हाई कोर्ट के आदेश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक विस्तृत वैज्ञानिक सर्वे किया था। यह सर्वे 98 दिनों तक चला (22 मार्च 2024 से शुरू होकर जून 2024 के अंत तक चला था। ASI ने 15 जुलाई 2024 को करीब 2,000 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान ढांचे का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर के अवशेषों और स्तंभों का उपयोग करके किया गया था वहां परमार काल की मूर्तियां, नक्काशीदार पत्थर और शिलालेख मिले हैं।