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पीएम मोदी का खास बताकर ठगी करने वाले को मिली जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश को किया रद्द

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपी कासिफ को जमानत दे दी, जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया था। काशिफ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है,. . .

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग, धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपी कासिफ को जमानत दे दी, जबकि इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया था। काशिफ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस चल रहा है, जिसमें आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दूसरे केंद्रीय मंत्रियों के करीबी सहयोगी होने का ढोंग करके लोगों से पैसे ऐंठे हैं।

इलाहाबाद HC ने कर दिया था इनकार

बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पहले काशिफ को जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यह बात नोट की कि काशिफ पहले ही लगभग तीन साल जेल में बिता चुका है। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि हम इस आदेश को रद्द करने के पक्ष में हैं। इसका कारण यह है कि अपीलकर्ता पिछले तीन साल से जेल में बंद है।

जमानत के साथ लिया यह वादा

अदालत ने काशिफ से यह वादा भी लिया कि वह भविष्य में संवैधानिक अधिकारियों या सरकारी अधिकारियों के नामों का इस्तेमाल नहीं करेगा। अदालत ने उसे चल रही कार्यवाही में सहयोग करने का निर्देश दिया और यह स्पष्ट किया कि यदि वह किसी भी शर्त का उल्लंघन करता है या अपने वादे को तोड़ता है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) उसकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकता है।

धोखाधड़ी और जालसाजी का केस

ईडी का यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक ECIR से जुड़ा है, जो गौतम बुद्ध नगर के सूरजपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR पर आधारित थी। इस FIR में धोखाधड़ी, जालसाजी और Information Technology Act के प्रावधानों सहित कई आरोप लगाए गए थे। जांचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि काशिफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी कुछ बदली हुई और मॉफ की हुई तस्वीरें अपलोड कीं, जिनमें वह PM मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ नजर आ रहा था। ऐसा उसने सरकारी हलकों के प्रभावशाली लोगों के साथ अपनी नजदीकी दिखाने के लिए किया था।

पैसे ऐंठने के लिए फोटो का इस्तेमाल

एजेंसी ने दावा किया कि उसने अपनी इस तस्वीर का इस्तेमाल लोगों से पैसे ऐंठने के लिए किया। वह उन्हें सरकारी नौकरी, ठेके और सरकारी विभागों में मदद दिलाने का वादा करता था। ED ने इसके अलावा, उससे जुड़े ठिकानों से कथित तौर पर 1.10 करोड़ रुपये से ज्यादा की जब्ती पर भी भरोसा जताया और यह तर्क दिया कि यह रकम अपराध से हासिल की गई कमाई थी।

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