मुंबई। भारतीय शेयर बाजार के लिए सोमवार (18 मई) का दिन बेहद अमंगल वाला साबित हुआ. कमजोर ग्लोबल संकेत और चौतरफा बिकवाली के चलते दलाल स्ट्रीट में आज शुरुआती कारोबार से ही कोहराम मच गया. हफ्ते के पहले ही कारोबारी दिन बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी इंट्राडे ट्रेड में 1% से ज्यादा टूट गए. सेंसेक्स 1,000 अंक से ज्यादा की गिरावट के साथ 74,180 के निचले लेवल पर आ गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (Nifty) लुढ़ककर 23,317 के लेवल पर पहुंच गया. इस गिरावट का असर केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बीएसई के मिड-कैप और स्मॉल-कैप सूचकांक में भी 2% की बड़ी गिरावट देखी गई.
अचानक शेयर बाजार में आई गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप पिछले सत्र के 461 लाख करोड़ से घटकर 453 लाख करोड़ के नीचे चला गया. इस तरह कुछ ही घंटों के कारोबार में निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपये डूब गए. कारोबारी सत्र के दौरान सुबह करीब 10.30 बजे सेंसेक्स 820 अंक गिरकर 74,410 अंक पर आ गया. वहीं, निफ्टी सूचकांक -265 अंक की गिरावट के साथ 23,377 अंक पर ट्रेड कर रहा है. आइए जानते हैं आज शेयर बाजार में गिरावट आने के 5 बड़े कारण-
वेस्ट एशिया में जंग केी आहट
शेयर बाजार में आई इस सुनामी के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में अचानक बढ़ा जियो-पॉलिटिकल टेंशन है. यूएई (UAE) के बराक न्यूक्लियर पावर प्लांट (Barakah Nuclear Power Plant) पर हुए ड्रोन हमले ने सुलगती आग में घी का काम किया है. इससे दुनियाभर के बाजार का मूड बिगड़ गया है. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सीजफायर की बातचीत अधर में लटकी है और तमाम कोशिशों के बाद भी विवाद सुलझता नहीं दिख रहा. इसी बीच ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है, और बेहतर होगा कि वे जल्दी कदम उठाएं, वरना नामोनिशान नहीं बचेगा.
कच्चे तेल के दाम में लगी आग
न्यूक्लियर पावर प्लांट के पास हुए ड्रोन हमले और तनाव के चलते इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम में उबाल आ गया है. ब्रेंट क्रूड फिर 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया. इससे दुनिया में महंगाई की चिंता बढ़ गई है. यदि कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमत में एक और बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है, इससे सीधे तौर पर महंगाई बढ़ेगी. चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए महंगा तेल देश के व्यापार घाटे को बढ़ाता है. महंगे तेल से भारतीय रुपया कमजोर होता है और कंपनियों के प्रॉफिट को चोट पहुंचती है.
रिकॉर्ड लो पर भारतीय रुपया
क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमत और ग्लोबल लेवल पर बॉन्ड यील्ड में आ रही तेजी के दबाव में भारतीय रुपया यूएस डॉलर के मुकाबले 96.23 के अब सबसे निचले लेवल पर बंद हुआ. इस साल अब तक डॉलर के मुकाबले रुपया 7% टूट चुका है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रुकने और यूएस बॉन्ड यील्ड के 4.62% पर पहुंचने से रुपये पर दबाव बढ़ा है. हालांकि, आरबीआई (RBI) बाजार की उथल-पुथल को कंट्रोल करने पर फोकस कर रहा है. बाजार के जानकारों को डर है कि यदि यही स्थिति रही तो इस साल के आखिर तक रुपया प्रति डॉलर 100 के मनोवैज्ञानिक लेवल को छू सकता है. विदेशी पूंजी देश से बाहर जाने से शेयर बाजार पर दबाव बना रहेगा.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल से बिगड़ा खेल
भारत जैसे उभरते बाजार (Emerging Markets) के लिए यूएस बॉन्ड यील्ड का बढ़ना हमेशा से बड़ा झटका रहा है. अमेरिका में 10 साल के सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज (यील्ड) बढ़कर 4.62% हो गया है. अमेरिका में बिना किसी रिस्क के इतना अच्छा रिटर्न मिलता है तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FPI) भारतीय बाजार जैसे रिस्क भरे मार्केट से अपना पैसा निकालकर यूएस मार्केट में लगाने लगते हैं. जानकारों का कहना है अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी विदेशी निवेशकों की बिकवाली को और तेज करेगी, जिससे रुपये की वैल्यू और घटेगी.
तकनीकी लेवल टूटने से बढ़ी बिकवाली
इस पूरे घटनाक्रम के बीच तकनीकी मोर्चे पर भी बाजार को बड़ा झटका लगा है. निफ्टी 50 ने ट्रेड के दौरान 23,400 के अहम सपोर्ट लेवल को ओर तोड़ दिया. इससे निवेशकों के मन में डर बन गया और वे पैनिक सेलिंग करने लगे. कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च हेड श्रीकांत चौहान का कहना है कि यदि निफ्टी तकनीकी रूप से 23,600 के लेवल पर बना रहता है तो इसमें और गिरावट की गुंजाइश है. 23,400 का लेवल टूटने के बाद बाजार का अगला सपोर्ट लेवल और नीचे खिसक गया.