नई दिल्ली। भारत और ईरान के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर अमेरिका ने कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हालिया मुलाकात में किसी व्यापार समझौते पर चर्चा हुई।
रूबियो ने यह टिप्पणी बुधवार को फॉक्स न्यूज रेडियो के द ब्रायन किल्मीड शो में बातचीत के दौरान की। उनसे प्रधानमंत्री मोदी और पेजेशकियन की मुलाकात को लेकर सवाल पूछा गया था। यह मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान बिश्केक में हुई थी।
‘हर देश अपनी विदेश नीति विकसित करता है’
मार्को रूबियो ने कहा कि दुनिया के कई देश ईरानी शासन के साथ बातचीत करते हैं और हर देश अपनी विदेश नीति के अनुसार फैसले लेता है।
उन्होंने कहा कि अमेरिका ने भी ईरानी शासन के कुछ तत्वों के साथ विभिन्न चर्चाओं के दौरान संपर्क किया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में किसी देश को उसकी मदद नहीं करनी चाहिए।
‘ईरान की मदद करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध’
रूबियो ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख को दोहराते हुए कहा कि किसी भी देश को ईरान को प्रतिबंधों से बचने के लिए ऐसे तंत्र बनाने में मदद नहीं करनी चाहिए, जिससे तेहरान को राजस्व हासिल हो सके।
उनके मुताबिक, इस धन का इस्तेमाल ईरान आतंकवाद को समर्थन देने और परमाणु हथियार बनाने की कोशिशों में कर सकता है। रूबियो ने चेतावनी दी कि यदि कोई देश इस तरह ईरान की मदद करता है, तो अमेरिका को उस देश पर भी प्रतिबंध लगाना पड़ सकता है।
मोदी ने ईरान के साथ व्यापार बढ़ाने की बात कही
31 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से बिश्केक में मुलाकात की थी। यह दोनों नेताओं की फरवरी में शुरू हुए ईरान-अमेरिका संघर्ष के बाद पहली द्विपक्षीय बैठक थी।
मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को खत्म करने के सभी प्रयासों के प्रति भारत का समर्थन दोहराया। उन्होंने क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने और आम नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के महत्व पर भी जोर दिया।मोदी ने कहा कि भारत आने वाले समय में ईरान के साथ अपने व्यापार को ‘विस्तार और विविधता’ देना चाहता है।
भारत-ईरान रिश्तों को मजबूत करने पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति पेजेशकियन से मुलाकात कर विभिन्न क्षेत्रों में भारत और ईरान की लंबे समय से चली आ रही दोस्ती को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार के दायरे को बढ़ाने और उसे अधिक विविध बनाने की इच्छा है। साथ ही, क्षेत्रीय हालात पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई।
पेजेशकियन ने भारत से मांगी मदद
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी से क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों में भारत की भूमिका बढ़ाने की अपील की।ईरानी पक्ष के अनुसार, पेजेशकियन ने मोदी से कहा कि भारत के विभिन्न पक्षों के साथ व्यापक संपर्क हैं। ऐसे में भारत अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर संबंधित पक्षों को युद्ध और खूनखराबे के रास्ते से हटाकर बातचीत और समझौते की दिशा में ले जाने में मदद कर सकता है।
भारत के सामने संतुलन की चुनौती
एक तरफ भारत ईरान के साथ अपने पुराने रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की प्रतिबंध नीति और रूबियो की चेतावनी ने नई दिल्ली के सामने कूटनीतिक संतुलन की चुनौती बढ़ा दी है। फिलहाल भारत ने ईरान के साथ व्यापार बढ़ाने की अपनी इच्छा स्पष्ट कर दी है, जबकि अमेरिका ने यह संकेत दिया है कि ईरान को प्रतिबंधों से बचाने में किसी भी तरह की मदद उसके लिए गंभीर चिंता का विषय होगी।