कोलकाता। ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने वर्ष 1975 में लागू किए गए आपातकाल और राज्य में पिछले 15 वर्षों के शासन की तुलना करते हुए आरोप लगाया कि दोनों ही दौर में लोकतांत्रिक मूल्यों को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सत्ता अहंकार और निरंकुशता का रूप ले लेती है, तब उसका पतन निश्चित होता है। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि जनता की आवाज़ को दबाने वाली किसी भी सरकार को अंततः जनता ही सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाती है।
आम लोगों के अधिकारों पर अंकुश लगाया गया
अपने संबोधन में उन्होंने 25 जून 1975 को देश में लागू किए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाया गया था। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में पिछले डेढ़ दशक के शासनकाल में भी लोकतांत्रिक संस्थाओं और आम लोगों के अधिकारों पर इसी तरह प्रभाव पड़ा।
मुख्यमंत्री ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध लोकतांत्रिक सिद्धांत “जनता की सरकार, जनता के द्वारा और जनता के लिए” का उल्लेख करते हुए कहा कि पूर्व सरकार ने इसे बदलकर “पार्टी की सरकार, पार्टी के द्वारा और पार्टी के लिए” बना दिया था। उनके अनुसार शासन व्यवस्था में दलगत हितों को जनता के हितों से ऊपर रखा गया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि सत्ता का अहंकार कभी स्थायी नहीं होता। इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मजबूत से मजबूत नेता भी जनता के फैसले के आगे टिक नहीं पाए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल की जनता ने भी लोकतांत्रिक तरीके से अहंकार की राजनीति को जवाब दिया है।
लोकतंत्र की रक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का किया आह्वान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने आपातकाल के दौरान उत्पीड़न झेलने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सामूहिक जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजनीति में ‘मैं’ नहीं बल्कि ‘हम’ की भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए तथा तानाशाही, अन्याय और निरंकुशता से दूर रहकर लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है।