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अमेरिका भारत पर टैरिफ बम फोड़ने की तैयारी में, रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव, अमेरिकी सीनेट में नया विधेयक पेश

नई दिल्ली। अमेरिका की कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के एक समूह ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का. . .

नई दिल्ली। अमेरिका की कांग्रेस में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के एक समूह ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसके तहत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस सूची में भारत, चीन, हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान शामिल हैं। यदि यह विधेयक कानून का रूप लेता है, तो रूस के ऊर्जा व्यापार पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका पहली बार टैरिफ को एक भू-राजनीतिक रणनीति के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।
यह विधेयक रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम की पहल पर तैयार किया गया था। उनके हालिया निधन के बाद इसे उनकी राजनीतिक विरासत के रूप में अमेरिकी सीनेट में पेश किया गया। दोनों प्रमुख दलों के सांसदों ने इसे रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

किन देशों पर लागू होगा प्रस्तावित 100% टैरिफ?

विधेयक के अनुसार, रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल खरीदने वाले निम्नलिखित देशों पर 100% तक आयात शुल्क लगाया जा सकता ह। इनमें भारत, चीन
हंगरी, स्लोवाकिया और अजरबैजान शामिल है। 15 यूरोपीय देशों को मिलेगी छूट
प्रस्तावित विधेयक में 15 यूरोपीय देशों को इस शुल्क से बाहर रखा गया है। अमेरिकी सांसदों का कहना है कि ये देश रूस से सीमित मात्रा में ऊर्जा खरीदते हैं और धीरे-धीरे अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं।
डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह केवल टैरिफ लगाने का प्रस्ताव नहीं है, बल्कि रूस की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा क्षेत्र, रक्षा उद्योग और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर व्यापक आर्थिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने बताया कि 100% टैरिफ केवल रूस के सबसे बड़े तेल आयातकों पर लागू होगा। उल्लेखनीय है कि विधेयक के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, जिसे बाद में घटाकर 100% कर दिया गया।

भारत पर क्या पड़ सकता है असर?

यदि यह विधेयक अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त कर लेता है, तो भारत से अमेरिका निर्यात होने वाले कई उत्पादों पर 100% तक आयात शुल्क लगाया जा सकता है।

संभावित प्रभावों में शामिल हैं:

भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है। अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात की लागत बढ़ सकती है। रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने की भारत की रणनीति प्रभावित हो सकती है। हालांकि, फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित विधेयक है। इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा, सीनेट और राष्ट्रपति की मंजूरी आवश्यक होगी।
गौरतलब है कि अमेरिका पहले भी रूस से ऊर्जा आयात को लेकर भारत सहित कई देशों पर दबाव बनाता रहा है। हाल के वर्षों में उसने विभिन्न व्यापारिक और प्रतिबंधात्मक उपायों के जरिए रूस के ऊर्जा कारोबार को सीमित करने की कोशिश की है।

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