Home » पश्चिम बंगाल » कोलकाता: विक्टोरिया हाउस पर कोर्ट की ‘नो एंट्री’, अब बिड़ला तारामंडल के सामने रैली कर सकती हैं ममता बनर्जी

कोलकाता: विक्टोरिया हाउस पर कोर्ट की ‘नो एंट्री’, अब बिड़ला तारामंडल के सामने रैली कर सकती हैं ममता बनर्जी

कोलकाता । तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी गुट) की आगामी 21 जुलाई की ‘शहीद दिवस’ रैली के आयोजन स्थल को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को देखते हुए रैली के मूल स्थान में. . .

कोलकाता । तृणमूल कांग्रेस (ममता बनर्जी गुट) की आगामी 21 जुलाई की ‘शहीद दिवस’ रैली के आयोजन स्थल को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था को देखते हुए रैली के मूल स्थान में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।

कोर्ट में वकील की दलीलें और नए विकल्प

रैली की अनुमति वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान ममता गुट के वकील कल्याण बनर्जी ने न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की अदालत में दलील दी कि साल 1993 से (दो-तीन वर्षों को छोड़कर) यह रैली लगातार मध्य कोलकाता के विक्टोरिया हाउस के सामने ही आयोजित की जाती रही है।

हालांकि, अदालत के कड़े रुख को देखते हुए उन्होंने कुछ वैकल्पिक स्थानों के सुझाव भी दिए:

  • बिड़ला तारामंडल (Birla Planetarium): विक्टोरिया हाउस की अनुमति न मिलने पर इसे दक्षिण कोलकाता में बिड़ला तारामंडल के सामने आयोजित करने की इजाजत मांगी गई है, जो अन्य रैलियों से करीब 2 किलोमीटर दूर है।
  • अन्य विकल्प: मेट्रो चैनल या एस्प्लेनेड स्थित डोरिना क्रॉसिंग को भी विकल्प के तौर पर पेश किया गया।

कोर्ट और पुलिस का रुख

न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य ने साफ लफ्जों में कहा कि वे विक्टोरिया हाउस के सामने रैली की अनुमति नहीं देंगे, क्योंकि इससे शहर के व्यस्त और प्रमुख चित्तरंजन एवेन्यू (CR Avenue) पर यातायात पूरी तरह ठप हो जाएगा।

  • पुलिस की कार्रवाई को चुनौती: ममता गुट ने कोलकाता पुलिस द्वारा विक्टोरिया हाउस के आसपास के इलाके में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू करने के फैसले को अदालत में चुनौती दी है।
  • अन्य रैलियों का हवाला: वकील कल्याण बनर्जी ने तर्क दिया कि पुलिस ने इसी दिन दो अन्य रैलियों को हरी झंडी दी है—एक मायो रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने और दूसरी शहीद मीनार मैदान पर कांग्रेस पार्टी द्वारा। तो फिर इस रैली पर पाबंदी क्यों?

क्यों मनाया जाता है ‘शहीद दिवस’?

इतिहास: 21 जुलाई 1993 को जब ममता बनर्जी युवा कांग्रेस की अध्यक्ष थीं, तब उनके नेतृत्व में निकाली गई एक रैली के दौरान पुलिस फायरिंग में 13 कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मौत हो गई थी। उन कार्यकर्ताओं की याद में ही हर साल 21 जुलाई को ‘शहीद दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम