कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 440 करोड़ रुपये के फंड से जुड़े बैंक खातों के फ्रीज मामले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) को कलकत्ता हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी पक्ष को “अतिरिक्त सुविधा” नहीं दी जाएगी और सुनवाई तय सूची के अनुसार ही होगी।
तृणमूल के तीन बैंक खाते फ्रीज, स्वच्छता पर उठे सवाल
मामला उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस से जुड़े तीन बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया। आरोप है कि इन खातों में मौजूद लगभग 440 करोड़ रुपये के फंड की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल हैं। ऋतव्रत शिबिर के 10 विधायकों ने इस संबंध में पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें फंड की उपयोगिता और स्रोत को लेकर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था।
तृणमूल की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार
खातों को दोबारा चालू करने की मांग को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने हाईकोर्ट का रुख किया था और मामले में तत्काल सुनवाई की अपील की थी। हालांकि, न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने इस अनुरोध को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई तय सूची (रोस्टर) के अनुसार ही होगी और किसी भी पक्ष को विशेष प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी: “कोई विशेष सुविधा नहीं दी जाएगी”
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने साफ कहा कि प्रक्रिया के अनुसार ही सभी मामलों को सुना जाएगा। अदालत ने यह भी दोहराया कि न्यायिक कार्यवाही में किसी भी तरह की विशेष छूट या प्राथमिकता स्वीकार नहीं की जाएगी।
केंद्र की ओर से समय की मांग
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से अनुरोध किया कि सुनवाई 2 जुलाई से पहले न की जाए, क्योंकि वह कुछ दिनों तक उपलब्ध नहीं रहेंगे। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि 2 जुलाई से पहले इस मामले पर कोई सुनवाई न हो।
अभिषेक बनर्जी से जुड़े मामलों में भी नहीं मिली राहत
इसी बीच तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी को भी अदालत से राहत नहीं मिली है। विदेश यात्रा की अनुमति संबंधी उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग खारिज कर दी गई। इसके अलावा, आवाज के नमूने (वॉयस सैंपल) से जुड़े नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर भी उन्हें फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। इस मामले की सुनवाई अब निर्धारित सूची के अनुसार आगे बढ़ेगी।
राजनीतिक हलचल तेज, सभी की नजरें अदालत पर
लगातार अदालत से मिल रहे झटकों के बाद तृणमूल कांग्रेस की कानूनी रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजरें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस 440 करोड़ रुपये के फंड फ्रीज मामले में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।