नई दिल्ली: भारत के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे आमतौर पर ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। रॉ के पूर्व एजेंट लकी बिष्ट ने दावा किया है कि बांग्लादेश में कई आतंकी प्रशिक्षण शिविर संचालित हो रहे हैं, जहां पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और पाकिस्तानी सेना के अधिकारी आतंकियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं।
ISI प्रमुख की कथित गुप्त यात्रा
लकी बिष्ट के अनुसार, पाकिस्तान की ISI के प्रमुख आसिम मलिक ने वर्ष 2025 में बांग्लादेश दौरे के दौरान इन कथित आतंकी कैंपों का गुप्त दौरा भी किया था। उनका दावा है कि इस यात्रा की जानकारी सार्वजनिक नहीं होने दी गई।
किन इलाकों में बताए गए आतंकी कैंप?
पूर्व रॉ एजेंट ने बांग्लादेश के चार क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए वहां सक्रिय आतंकी गतिविधियों का दावा किया है।
1. रंगपुर
रंगपुर को सिलीगुड़ी कॉरिडोर के सबसे नजदीक बताया गया है, जिससे भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ सकती हैं।
2. चटगांव हिल ट्रैक्ट्स
दावा किया गया है कि इस क्षेत्र में ISI के समर्थन से हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश (HuJI-B) और लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठन सक्रिय हैं।
3. सिलहट
बिष्ट के मुताबिक, यहां अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT), जिसे अल-कायदा से जुड़ा संगठन माना जाता है, के गुप्त कैंप संचालित हो रहे हैं।
4. नेत्रोकोना
उनका दावा है कि इस इलाके में जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) और नव-जेएमबी, जिन्हें ISIS समर्थक बताया जाता है, अपनी गतिविधियां बढ़ा रहे हैं।
भारत के लिए क्यों अहम है ‘चिकन नेक’?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल में स्थित एक संकरा भू-भाग है, जिसे उसके पतले आकार के कारण ‘चिकन नेक’ कहा जाता है। यह भारत के आठ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला एकमात्र स्थलीय मार्ग है। सबसे संकरी जगह पर इसकी चौड़ाई करीब 22 किलोमीटर है। यही वजह है कि इसे भारत की सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
किन राज्यों को जोड़ता है यह कॉरिडोर?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर के माध्यम से भारत के ये आठ पूर्वोत्तर राज्य देश के अन्य हिस्सों से जुड़े हैं:
- अरुणाचल प्रदेश
- असम
- मणिपुर
- मेघालय
- मिजोरम
- नागालैंड
- सिक्किम
- त्रिपुरा
दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं
गौरतलब है कि बांग्लादेश में आतंकी कैंपों और ISI की कथित भूमिका को लेकर किए गए ये दावे पूर्व रॉ एजेंट लकी बिष्ट के हैं। इन दावों की भारत सरकार या किसी आधिकारिक एजेंसी द्वारा सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है।