नई दिल्ली: नीट पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। प्रधानमंत्री ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया ताकि “राष्ट्र विरोधी ताकतें” इस मुद्दे का राजनीतिक फायदा उठाकर लोगों के बीच भ्रम न फैला सकें। उन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा कि इस पूरे घटनाक्रम से उनका मन बेहद दुखी है।
अभिजीत दिपके का सरकार पर हमला
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह जनता और युवाओं की जीत है। उन्होंने कहा, “इस सरकार में कहा जाता था कि इस्तीफे नहीं होते हैं। लेकिन हम कहना चाहते हैं कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए। अगर जनता डरती नहीं है और सरकार के सामने झुकती नहीं है, तो किसी भी मंत्री का इस्तीफा लिया जा सकता है।”
‘युवाओं की ताकत और संविधान की जीत’
दिपके ने कहा कि नीट मामले में देश के युवाओं और छात्रों ने अपनी ताकत दिखाई है। उनके मुताबिक यह लोकतंत्र और संविधान की जीत है। उन्होंने कहा कि आवाज उठाना जरूरी है, क्योंकि जनता की जवाबदेही तय करने से ही सरकार और प्रशासन जिम्मेदारी से काम करेंगे।
पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग
अभिजीत दिपके ने नीट विवाद से जुड़े उन छात्रों के परिवारों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की, जिन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या की। उन्होंने कहा कि वह पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
दिपके ने 20 तारीख को हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने डीसीपी संदीप लांबा, एसीपी अजय शर्मा और सचिन शर्मा का नाम लेते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि एक केंद्रीय मंत्री इस्तीफा दे सकते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीतिक हलचल तेज
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष जहां इसे जनता के दबाव और सरकार की जवाबदेही से जोड़ रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि यह फैसला विवाद पर राजनीति रोकने और तथ्यों के सामने आने देने के उद्देश्य से लिया गया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार नीट विवाद और इससे जुड़े अन्य मामलों में आगे क्या कदम उठाती है।