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578 गेंदों तक नहीं मिला कोई गेंदबाज, 343 रन ठोकने के बाद 60 दिन में पहली बार आउट हुए तिलक वर्मा

दलीप ट्रॉफी के फाइनल में साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन उनकी बेहतरीन पारी का अंत बेहद निराशाजनक अंदाज में हुआ। तिलक वर्मा महज एक रन से शतक से चूक गए।. . .

दलीप ट्रॉफी फाइनल में शतक से सिर्फ एक रन दूर रह गए साउथ जोन के कप्तान, 211 गेंदों की जुझारू पारी का हुआ अंत

नई दिल्ली। दलीप ट्रॉफी के फाइनल में साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन उनकी बेहतरीन पारी का अंत बेहद निराशाजनक अंदाज में हुआ। तिलक वर्मा महज एक रन से शतक से चूक गए। उन्होंने 211 गेंदों का सामना करते हुए 99 रन बनाए। हालांकि, उनकी यह पारी सिर्फ 99 रन की वजह से खास नहीं रही, बल्कि इसके पीछे छिपा उनका लगभग दो महीने लंबा अजेय सिलसिला इसे और भी खास बनाता है।

60 दिन बाद गिरा तिलक वर्मा का विकेट

तिलक वर्मा करीब 60 दिनों तक आउट नहीं हुए थे। इस दौरान उन्होंने लगातार कई पारियों में बल्लेबाजी की और गेंदबाजों को अपना विकेट लेने का मौका नहीं दिया। दलीप ट्रॉफी फाइनल में आउट होने के साथ ही उनकी इस शानदार अजेय यात्रा पर विराम लग गया। इन 60 दिनों के दौरान तिलक ने कुल 578 गेंदों का सामना किया और 343 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ लंबी पारियां खेलीं, बल्कि मुश्किल परिस्थितियों में क्रीज पर टिके रहने की अपनी क्षमता का भी शानदार प्रदर्शन किया।

जिम्बाब्वे दौरे से शुरू हुआ था सिलसिला

तिलक वर्मा के लगातार नाबाद रहने का सिलसिला जिम्बाब्वे दौरे से शुरू हुआ था। वहां उन्होंने तीनों टी20 मुकाबलों में बल्लेबाजी की, लेकिन किसी भी मैच में अपना विकेट नहीं गंवाया। इसके बाद घरेलू क्रिकेट में भी उनका शानदार प्रदर्शन जारी रहा। दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में नॉर्थ जोन के खिलाफ तिलक ने दोनों पारियों में शानदार बल्लेबाजी की। उन्होंने पहली पारी में 116 रन और दूसरी पारी में 51 रन बनाए और दोनों ही पारियों में नाबाद रहे।

इस तरह जिम्बाब्वे दौरे से लेकर दलीप ट्रॉफी के फाइनल तक तिलक लगातार गेंदबाजों के लिए मुश्किल बने रहे।

578 गेंदों में 343 रन, आंकड़े बताते हैं कहानी

तिलक वर्मा के पिछले 60 दिनों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो उनके आंकड़े उनकी बल्लेबाजी की निरंतरता को साफ तौर पर दिखाते हैं।

60 दिन — नाबाद सिलसिला
578 गेंद — सामना किया
343 रन — बनाए
116 रन — सेमीफाइनल में सर्वश्रेष्ठ पारी
99 रन — फाइनल की पहली पारी में

इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि तिलक किस तरह लंबे समय तक क्रीज पर टिके रहे। खास बात यह रही कि उन्होंने आक्रामक बल्लेबाजी के साथ धैर्य का भी शानदार संतुलन दिखाया।

दूसरे फर्स्ट क्लास मैच में खेल रहे गेंदबाज ने किया आउट

तिलक वर्मा का यह शानदार सिलसिला आखिरकार दलीप ट्रॉफी फाइनल में समाप्त हुआ। उन्हें ऑफ स्पिनर कुनैन कुरैशी ने आउट किया।कुरैशी के लिए भी यह विकेट खास रहा, क्योंकि वह अपना महज दूसरा फर्स्ट क्लास मुकाबला खेल रहे थे। तिलक वर्मा जैसे बल्लेबाज का महत्वपूर्ण विकेट हासिल करना उनके लिए निश्चित रूप से यादगार उपलब्धि बन गया। यह उनका फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पांचवां विकेट बताया गया है।

शतक से चूके, लेकिन छोड़ गए बड़ी छाप

फाइनल में 99 रन पर आउट होने का मलाल तिलक वर्मा को जरूर रहा होगा। 211 गेंदों तक क्रीज पर टिकने के बाद वह शतक से सिर्फ एक रन दूर रह गए। लेकिन उनकी पारी को केवल शतक से चूकने के नजरिए से देखना उनके प्रदर्शन के साथ न्याय नहीं होगा।लगातार 60 दिनों तक नाबाद रहना, 578 गेंदों का सामना करना और इस दौरान 343 रन बनाना बताता है कि तिलक वर्मा इस समय किस तरह की लय में हैं। दलीप ट्रॉफी फाइनल में उनकी 99 रन की पारी भले ही शतक में तब्दील नहीं हो सकी, लेकिन इस प्रदर्शन ने एक बार फिर उनकी बल्लेबाजी की क्षमता, धैर्य और लंबे समय तक विकेट पर टिके रहने की काबिलियत को सामने रखा है।

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