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नहीं रहे दिग्गज नेता भास्कर राव, आंध्र प्रदेश में मुख्यमंत्री के साथ बगावत करके खुद बन गए थे मुख्यमंत्री

डेस्क। आंध्र प्रदेश की राजनीति का एक अहम चेहरा अब इतिहास बन गया है। अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का बुधवार को निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। उनके निधन से राज्य की राजनीति. . .

डेस्क। आंध्र प्रदेश की राजनीति का एक अहम चेहरा अब इतिहास बन गया है। अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का बुधवार को निधन हो गया। वे 90 वर्ष के थे। उनके निधन से राज्य की राजनीति में एक युग का अंत माना जा रहा है।

विवादों में घिरा रहा सफर

नादेंदला भास्कर राव का राजनीतिक जीवन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वे उस दौर में मुख्यमंत्री बने जब आंध्र प्रदेश की राजनीति तेजी से बदल रही थी।
1984 में उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए तेलुगु देशम पार्टी के संस्थापक एटी रमा राव के खिलाफ बगावत कर दी थी। यह बगावत इतनी बड़ी थी कि उन्होंने सत्ता पर कब्जा कर लिया और खुद मुख्यमंत्री बन गए। हालांकि, यह सरकार ज्यादा समय तक नहीं चल पाई और कुछ ही हफ्तों में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। इस घटना को आज भी आंध्र प्रदेश की राजनीति के सबसे बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों में गिना जाता है।

छोटा कार्यकाल, लेकिन बड़ा असर

भास्कर राव का मुख्यमंत्री कार्यकाल भले ही छोटा रहा, लेकिन उसका असर लंबे समय तक महसूस किया गया। उनकी सरकार को जनता और राजनीतिक दलों दोनों से कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा।

उस समय राज्य में राजनीतिक अस्थिरता बढ़ गई थी और केंद्र की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठे थे। यही वजह है कि उनका नाम अक्सर राजनीतिक उठापटक और सत्ता संघर्ष के संदर्भ में लिया जाता है।

कांग्रेस से जुड़ाव और लंबा राजनीतिक करियर

भास्कर राव का जुड़ाव लंबे समय तक कांग्रेस से रहा। उन्होंने पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं और राज्य की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।
वे एक अनुभवी नेता माने जाते थे, जिन्होंने कई दशकों तक सक्रिय राजनीति की। उनके समर्थकों का मानना था कि वे संगठन और प्रशासन दोनों में मजबूत पकड़ रखते थे।

निधन पर शोक की लहर

उनके निधन की खबर फैलते ही राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके योगदान को याद किया। राजनीतिक विरोधी भी इस बात को मानते हैं कि भास्कर राव ने आंध्र प्रदेश की राजनीति को एक अलग दिशा दी। उनके फैसलों और कदमों पर भले ही विवाद रहे हों, लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

विवादित लेकिन प्रभावशाली विरासत

भास्कर राव की विरासत हमेशा चर्चा में रहेगी। एक तरफ वे सत्ता के लिए उठाए गए अपने कदमों के कारण आलोचना का सामना करते रहे, तो दूसरी ओर उन्हें एक मजबूत और निर्णायक नेता के रूप में भी देखा गया।

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