इस्लामाबाद। सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी एक बार फिर खुलकर सामने आई है। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो-जरदारी ने भारत के खिलाफ तीखा बयान देते हुए कहा कि अगर पाकिस्तान के जल अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हुई, तो उसका जवाब केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के स्तर पर भी दिया जा सकता है।
इस्लामाबाद में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में बोलते हुए बिलावल ने पाकिस्तान की परमाणु नीति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था और जल संसाधनों पर खतरा उन परिस्थितियों में आता है जिन्हें पाकिस्तान अपने अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती मानता है।
पानी रोका तो अस्तित्व पर हमला माना जाएगा
बिलावल ने कहा कि यदि पाकिस्तान के जल स्रोतों को बाधित किया गया और इससे देश में गंभीर संकट पैदा हुआ, तो इसे केवल पर्यावरण या जल विवाद नहीं बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व पर हमला माना जाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि ऐसी स्थिति में व्यापक राष्ट्रीय प्रतिक्रिया दी जा सकती है।
भारत के फैसले के बाद बढ़ा विवाद
भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले** के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। इसके बाद से पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहा है और भारत के फैसले का विरोध कर रहा है।
क्यों अहम है सिंधु जल संधि?
पाकिस्तान की लगभग 80 प्रतिशत कृषि भूमि*सिंधु नदी प्रणाली के पानी पर निर्भर है। संधि के तहत रावी, ब्यास और सतलुज का पानी भारत के हिस्से में आता है, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान को मिलता है। पाकिस्तान का आरोप है कि भारत बांध और अन्य परियोजनाओं के जरिए उसके जल अधिकारों को प्रभावित कर रहा है, जबकि भारत का कहना है कि उसकी परियोजनाएं संधि के दायरे में हैं।
पाकिस्तान की परमाणु रणनीति पर चर्चा
पाकिस्तान की घोषित रणनीति “फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस” पर आधारित मानी जाती है, जबकि भारत की आधिकारिक नीति “नो फर्स्ट यूज़”*है। रक्षा विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान ने अपनी परमाणु नीति में “पहले इस्तेमाल” का विकल्प खुला रखा है, हालांकि किसी भी परमाणु संघर्ष के परिणाम दोनों देशों और पूरे क्षेत्र के लिए विनाशकारी होंगे।
भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है। ऐसे समय में परमाणु हथियारों से जुड़े बयान क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकते हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच यह विवाद कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।