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सिलीगुड़ी में 300 फीट टावर पर चढ़ा युवक, ड्रोन ने खोला राज; रेस्क्यू की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं, मांग सुनकर आप भी रह जायेंगे दांग

सिलीगुड़ी। सिलीगुड़ी के कंचनजंघा स्टेडियम में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब करीब 300 फीट ऊंचे पुराने मोबाइल टावर के शीर्ष पर एक युवक चढ़कर बैठ गया। युवक टावर के सबसे ऊपरी हिस्से में पैर लटकाकर आराम से. . .

सिलीगुड़ी। सिलीगुड़ी के कंचनजंघा स्टेडियम में बुधवार को उस वक्त हड़कंप मच गया, जब करीब 300 फीट ऊंचे पुराने मोबाइल टावर के शीर्ष पर एक युवक चढ़कर बैठ गया। युवक टावर के सबसे ऊपरी हिस्से में पैर लटकाकर आराम से नीचे शहर का नजारा देखता रहा, जबकि नीचे पुलिस, दमकल, सिविल डिफेंस और आपदा प्रबंधन की टीमें उसे सुरक्षित उतारने की कोशिश में जुटी रहीं।
युवक को लाल-गेरुए रंग के कपड़ों में टावर की चोटी पर बैठे देख मौके पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। मामला सामने आते ही प्रशासनिक अमले में अफरा-तफरी मच गई। टावर की ऊंचाई और युवक की स्थिति को देखते हुए सीधे ऊपर जाकर उसे नीचे लाना बेहद जोखिम भरा था।

ड्रोन उड़ाकर समझने की कोशिश, सामने आई हैरान करने वाली मांग

काफी कोशिशों के बावजूद जब युवक नीचे आने को तैयार नहीं हुआ, तो सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट ने ड्रोन की मदद से उससे संपर्क करने की कोशिश की। पुलिस को आशंका थी कि युवक किसी मानसिक परेशानी, भावनात्मक तनाव या किसी गंभीर वजह से टावर पर चढ़ा हो सकता है। लेकिन ड्रोन के जरिए बातचीत शुरू होते ही युवक ने जो मांग रखी, उसे सुनकर मौके पर मौजूद पुलिस और बचाव दल भी हैरान रह गए।
युवक ने टावर से नीचे उतरने के बदले ‘पोस्ते वाला मीठा कद्दू भजा’ खाने की इच्छा जताई। यानी मामला प्रेम, संपत्ति या किसी बड़े विरोध का नहीं, बल्कि खाने की एक अजीबोगरीब फरमाइश तक पहुंच गया।

बचाव दल की हर कोशिश नाकाम

युवक को समझाने और नीचे लाने की कई कोशिशें की गईं, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ। इसी बीच शहर के पर्वतारोही निहाल सरकार और उनकी एडवेंचर टीम मौके पर पहुंची। निहाल ने प्रशासन को भरोसा दिलाया कि ऊंचाई पर चढ़ना उनके लिए नया नहीं है और वे सुरक्षित तरीके से युवक तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद सिविल डिफेंस की टीम के साथ निहाल ने टावर पर चढ़ना शुरू किया। आखिरकार वे युवक तक पहुंच गए और उससे बातचीत कर उसे नीचे लाने की कोशिश की।

पोस्ते-कद्दू के बाद युवक ने कर दी ‘चॉपर’ की मांग!

मगर कहानी यहां खत्म नहीं हुई। ऊपर पहुंचने के बाद युवक ने नीचे आने के बजाय चॉपर या हेलिकॉप्टर में बैठकर घूमने की इच्छा जतानी शुरू कर दी। स्थिति को देखते हुए निहाल ने तुरंत अपनी रणनीति बदली। बातचीत में समय गंवाने के बजाय युवक को सुरक्षित तरीके से एक मजबूत स्ट्रेचरनुमा व्यवस्था में बांधा गया और नियंत्रित तरीके से टावर से नीचे उतारना शुरू किया गया।

चार घंटे बाद सुरक्षित जमीन पर पहुंचा युवक

करीब चार घंटे चले हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया। इसके बाद उसे तत्काल उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया, जहां उसका इलाज कराया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक तरफ पुलिस और बचाव दल की मुश्किलें बढ़ाईं, तो दूसरी तरफ मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था।
अब प्रशासन के सामने एक और सवाल है—आखिर इतना पुराना और करीब 300 फीट ऊंचा टावर एक युवक के लिए इतना आसानी से सुलभ कैसे हो गया? युवक टावर पर चढ़ा कैसे और इतनी ऊंचाई तक पहुंचने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी क्यों नहीं हो सकी?
एसीपी (ईस्ट) राणा मुखोपाध्याय के अनुसार, युवक की पहचान समेत पूरे मामले की जांच की जा रही है। संबंधित विभागों के बीच भी इस बात को लेकर जांच होगी कि युवक इतनी ऊंचाई तक आखिर पहुंचा कैसे।
हालांकि, इस पूरे ड्रामे के बाद सिलीगुड़ी में लोगों के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है—मेडिकल से लौटने के बाद आखिर उस ‘पोस्ते वाले कद्दू भजा’ की फरमाइश पूरी हुई या नहीं?

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