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आज भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा: जाने क्यों पूरी दुनिया के लिए खास है पुरी का यह महापर्व?, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं

डेस्क। ओडिशा के पुरी में आज सुबह 6 बजे मंगला आरती के साथ भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ हो गया। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल हो रहे हैं। हिंदू धर्म में. . .

डेस्क। ओडिशा के पुरी में आज सुबह 6 बजे मंगला आरती के साथ भगवान जगन्नाथ की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ हो गया। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक शामिल हो रहे हैं। हिंदू धर्म में यह यात्रा आस्था, भक्ति और समानता का प्रतीक मानी जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर तक नगर भ्रमण करते हैं। इस दौरान भक्त भगवान के रथ को अपने हाथों से खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए बड़ी संख्या में पुरी पहुंचते हैं।

राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं

रथ यात्रा के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के कई नेताओं ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और इस पावन पर्व की मंगलकामना की।

लाखों श्रद्धालुओं के बीच बड़ी चुनौती

हर वर्ष आयोजित होने वाली इस यात्रा में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में सुरक्षा, यातायात, स्वास्थ्य सेवाओं और ठहरने जैसी व्यवस्थाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होती हैं। इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह और आस्था हर साल इस आयोजन को और अधिक भव्य बनाती है।

जगन्नाथ रथ यात्रा से जुड़ी प्रमुख मान्यताएं

1. मौसी के घर की यात्रा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नौ दिवसीय यात्रा पर अपनी मौसी के घर, यानी गुंडिचा मंदिर जाते हैं।

कुछ धार्मिक ग्रंथों में गुंडिचा मंदिर को भगवान का जन्मस्थान भी माना गया है। वहीं एक अन्य कथा के अनुसार, तीनों भाई-बहन राजा इंद्रद्युम्न की रानी गुंडिचा से मिलने जाते हैं, जिन्हें मंदिर की स्थापना से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि भगवान यहां सात दिनों तक विश्राम करते हैं और मौसी के हाथों बने विशेष व्यंजनों का आनंद लेते हैं।

2. सभी भक्तों को दर्शन देने की परंपरा

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है। ऐसे में रथ यात्रा का विशेष महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस दौरान भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर सभी श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। यह परंपरा समानता और सर्वसमावेशी आस्था का संदेश देती है।

3. दर्शन से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति

धार्मिक मान्यता है कि रथ पर विराजमान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन मात्र से भक्तों के पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

पुरी मंदिर से जुड़े धार्मिक ग्रंथ ‘वामदेव संहिता’ के अनुसार, जो श्रद्धालु गुंडिचा मंदिर में एक सप्ताह तक भगवान के दर्शन करते हैं, उन्हें अपने पूर्वजों सहित बैकुंठ धाम में स्थान प्राप्त होता है।

4. रथ और रस्सी खींचने का धार्मिक महत्व

रथ को संधिनी शक्ति का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि रथ को स्पर्श करने मात्र से भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

वहीं रथ की रस्सी खींचना अत्यंत पुण्यदायी और पवित्र कार्य माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि ऐसा करने से उन्हें दैवीय आशीर्वाद मिलता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा नए शुभ अध्याय की शुरुआत होती है।

क्यों खास है पुरी की रथ यात्रा?

पुरी की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। भगवान जगन्नाथ का स्वयं मंदिर से बाहर आकर सभी भक्तों को दर्शन देना, विशाल रथों का निर्माण, लाखों श्रद्धालुओं की सहभागिता और सदियों पुरानी परंपराओं का निर्वहन इस आयोजन को विश्वभर में अद्वितीय बनाता है।

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