Home » कुछ हटकर » खुशियों का सफर बना काल : वियतनाम में अपनों की तरक्की का जश्न मना रहा ‘लावा’ परिवार समंदर में डूबा , काल के गाल में समाये 15 भारतीयों में 10 तमिलनाडु के

खुशियों का सफर बना काल : वियतनाम में अपनों की तरक्की का जश्न मना रहा ‘लावा’ परिवार समंदर में डूबा , काल के गाल में समाये 15 भारतीयों में 10 तमिलनाडु के

नई दिल्ली/हनोई। सोचिए, एक पिता अपनी नवजात पोती को वीडियो कॉल पर दुलारता है, मुस्कुराते हुए पत्नी से कहता है-“एक ऐसे द्वीप पर जा रहे हैं जहाँ नेटवर्क नहीं होगा, लौटकर बात करूँगा।” किसे पता था कि यह अलविदा हमेशा. . .

नई दिल्ली/हनोई। सोचिए, एक पिता अपनी नवजात पोती को वीडियो कॉल पर दुलारता है, मुस्कुराते हुए पत्नी से कहता है-“एक ऐसे द्वीप पर जा रहे हैं जहाँ नेटवर्क नहीं होगा, लौटकर बात करूँगा।” किसे पता था कि यह अलविदा हमेशा के लिए था। किसे पता था कि कंपनी से मिला ‘इनाम’ ज़िंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा। वियतनाम का खूबसूरत ‘फू क्वोक’ द्वीप शनिवार, 11 जुलाई को उस वक्त चीखों और मातम से गूंज उठा, जब लावा मोबाइल्स (LAVA) के कर्मचारियों और डीलर्स को ले जा रही एक स्पीडबोट चंद सेकेंड्स में समंदर में पलट गई। इस दर्दनाक हादसे में 15 भारतीयों की असमय मौत हो गई, जिनमें 14 डीलर-डिस्ट्रीब्यूटर और कंपनी का 1 जांबाज कर्मचारी शामिल था।

‘इंसेंटिव ट्रिप’ का खौफनाक अंत: मेहनत का इनाम लाशों में तब्दील

मारे गए सभी लोग लावा मोबाइल कंपनी के वो चुनिंदा चेहरे थे, जिन्होंने अपने खून-पसीने से कंपनी के कारोबार को ऊंचाई पर पहुँचाया था। इसी बेहतर प्रदर्शन के इनाम (Incentive) के तौर पर कंपनी ने उन्हें वियतनाम की इस ट्रिप पर भेजा था। 9 जुलाई को भारत से रवाना हुए इन चेहरों की आँखों में कामयाबी की चमक थी, लेकिन शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे प्रकृति के एक क्रूर थपेड़े ने सब कुछ तबाह कर दिया।चश्मदीद निर्मल कुमार की जुबानी:”स्पीडबोट महज़ 300-400 मीटर आगे बढ़ी थी कि अचानक आई एक विशाल लहर ने नाव को दाईं ओर झुका दिया। नाव में क्षमता से अधिक लोग सवार थे। पलक झपकते ही लोग एक-दूसरे पर गिर पड़े। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले नाव पलट गई।”

लापरवाही या बदकिस्मती? चीखते रहे लोग, मौके पर नहीं मिला मेडिकल स्टाफ

हादसे में बचे आंध्र प्रदेश के वितरक आशीष कुमार और तमिलनाडु के मुरुगराज ने जो बयां किया, वह रोंगटे खड़े करने वाला है। मुरुगराज ने बताया, “जब नाव पलटी, हम दबाव नहीं संभाल पाए। किसी तरह खिड़की तोड़कर बाहर निकले और रेलिंग पकड़ ली, लेकिन हमारे कई साथी देखते ही देखते समंदर के गहरे पानी में समा गए।”बचाव दल मौके पर पहुँचा ज़रूर, लेकिन घायलों का दावा है कि दुर्घटना स्थल पर तुरंत कोई मेडिकल टीम या आपातकालीन चिकित्सा दल मौजूद नहीं था। अगर समय पर इलाज मिलता, तो शायद कुछ और जानें बचाई जा सकती थीं।

टूट गए घर, बिखर गए सपने: ‘अब्दुल्ला’ की वो आखिरी वीडियो कॉल

मृतकों में शामिल शेख अब्दुल्ला की कहानी रूह कंपा देने वाली है। उनके रिश्तेदारों ने बताया कि अब्दुल्ला आमतौर पर यात्राओं पर नहीं जाते थे। पहले उन्होंने अपने बेटे को इस ट्रिप पर भेजने का मन बनाया था, लेकिन किस्मत उन्हें खुद खींचकर वियतनाम ले गई। शनिवार सुबह उन्होंने अपने बेटे से व्यापार की बात की और पोती को जी भरकर देखा। वह आख़िरी संवाद अब परिवार के लिए कभी न खत्म होने वाला रोना बन चुका है।

कहाँ के थे रहने वाले? (मृतकों का विवरण)

दूतावास के मुताबिक, इस हादसे ने दक्षिण भारत के तीन राज्यों को कभी न भरने वाला जख्म दिया है:

राज्यमृतकों की संख्या
तमिलनाडु10 (जे. सेंथिल कुमार, ए. मुरुगा प्रभु, एस. श्रीधर, शेख अब्दुल्ला, एन. बालाजी, सी. बी. विनय कुमार, एस. रविशंकर, एस. संतोष कुमार, के. बाबू, एस. अलगुराजन)
आंध्र प्रदेश03
केरल02

देश में शोक की लहर, शवों को वापस लाने की जद्दोजहद

इस अकल्पनीय त्रासदी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। पीएम मोदी ने ‘एक्स’ पर लिखा कि इस दुर्घटना की खबर से उनका दिल पूरी तरह टूट गया है।लावा कंपनी ने बयान जारी कर गहरा दुख जताया है और कहा है कि वे पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं। वर्तमान में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल की सरकारें, केंद्र सरकार और हनोई में भारतीय दूतावास के साथ मिलकर शवों को जल्द से जल्द भारत लाने और पीड़ित परिवारों की मदद करने में जुटी हैं।यह हादसा इस कड़वे सच को छोड़ गया है कि कभी-कभी खुशियों की तलाश में निकले कदम, वापस सिर्फ अपनों की लाशें बनकर लौटते हैं।

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