नई दिल्ली। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं, विशेषकर नीट-यूजी पेपर लीक विवाद को लेकर बढ़ते विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ कानून को और अधिक कठोर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में संशोधन संबंधी विधेयक को मंजूरी दे दी है। सरकार इस संशोधित विधेयक को आगामी 27 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य पेपर लीक माफियाओं, संगठित अपराध गिरोहों और परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रस्ताव
सरकार द्वारा तैयार किए गए संशोधन विधेयक में पेपर लीक से जुड़े अपराधों के लिए सजा और आर्थिक दंड दोनों को पहले की तुलना में काफी सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार—
- पेपर लीक के मामलों में दोषियों को 10 वर्ष तक का कठोर कारावास हो सकता है।
- दोषी व्यक्तियों या संगठनों पर 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
- संगठित तरीके से परीक्षा में धांधली करने वाले गिरोहों पर विशेष कार्रवाई का प्रावधान होगा।
- मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई कराई जाएगी।
सरकार का कहना है कि कठोर दंड व्यवस्था से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगेगी।
पीएम मोदी का आधी रात छात्रों के नाम संदेश
पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार रात लगभग 12 बजे सोशल मीडिया मंच एक्स पर 2 मिनट 56 सेकंड का वीडियो संदेश जारी कर छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाया कि सरकार इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई महीनों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पेपर लीक से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और वे जेल में हैं। साथ ही सरकार ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था कर रही है।प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत फास्ट-ट्रैक कोर्ट को ऐसे मामलों का फैसला कर तीन महीने के भीतर सजा सुनाना अनिवार्य किया जाएगा।
सरकार ने परीक्षा और परिणाम समय पर कराने का दिया हवाला
सरकार का कहना है कि उसकी प्राथमिकता छात्रों का शैक्षणिक वर्ष बचाना था। इसी उद्देश्य से सीमित समय में लगभग 22 लाख छात्रों की परीक्षा दोबारा आयोजित की गई और 19 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिए गए, ताकि विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित न हो।सरकार का दावा है कि अब कानून को और कठोर बनाकर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने का प्रयास किया जाएगा।
नीट विवाद पर प्रदर्शन जारी
इस बीच नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी हैं। प्रदर्शनकारी संगठन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार, गड़बड़ियों के लिए जवाबदेही तय करने तथा कथित रूप से पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।
सीबीआई जांच जारी, कई आरोपी गिरफ्तार
पेपर लीक मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रही है। जांच एजेंसी अब तक विभिन्न राज्यों से 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। एजेंसी पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है और विभिन्न राज्यों में पूछताछ एवं छापेमारी की कार्रवाई जारी है।
पेपर लीक के मुद्दे पर संसद में भी हंगामा
पेपर लीक विवाद को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बहस तेज है। विभिन्न विपक्षी दल इस मामले में सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। वहीं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर 26 दिनों तक अनशन कर चुके हैं।
मौजूदा कानून में क्या हैं प्रावधान?
देश में पहले से लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 लागू है। इस कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी 12 फरवरी 2024 को मिली थी और यह 21 जून 2024 से पूरे देश में प्रभावी है।
वर्तमान कानून के तहत—
- पेपर लीक करने पर: 3 से 5 वर्ष तक की जेल और 10 लाख रुपये तक जुर्माना।
- संगठित गिरोह के शामिल होने पर: 5 से 10 वर्ष तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक जुर्माना।
- परीक्षा एजेंसी दोषी पाए जाने पर: 1 करोड़ रुपये का जुर्माना, परीक्षा आयोजन की पूरी लागत की वसूली तथा अगले चार वर्षों तक परीक्षा आयोजित करने पर प्रतिबंध।
- इस कानून के तहत अपराध गैर-जमानती है और इसमें समझौते का कोई प्रावधान नहीं है।
- मामले की जांच केवल डीएसपी रैंक या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा की जा सकती है।
संशोधन से कानून और होगा सख्त
सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून में संशोधन के बाद पेपर लीक से जुड़े अपराधों के खिलाफ कार्रवाई और अधिक प्रभावी होगी। प्रस्तावित विधेयक में सजा, जुर्माना और न्यायिक प्रक्रिया को पहले से अधिक कठोर बनाया गया है, ताकि देश की परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके। अब इस संशोधन विधेयक को संसद में पेश किए जाने और उसके पारित होने पर सभी की निगाहें टिकी हैं।