बेंगलुरू। यह दर्दनाक और झकझोर देने वाली कहानी कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले के बांटवाल इलाके की है। कल्लडका के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में काम करने वाली लावण्या ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जिस राह से वह रोज घर लौटती है, वही राह उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगी। आरोपी चेतन (22 साल), जो उसका दूर का रिश्तेदार था, उसने प्यार के नाम पर लावण्या के खून से होली खेल डाली।
आखिरी कॉल और वो अनजाना खौफ
गुरूवार की उस काली शाम को लावण्या रोज की तरह काक्यापाडावु जाने के लिए सरकारी बस (KSRTC) में बैठी थी। उसे नहीं पता था कि मौत उसकी ताक में बाहर एक कार में बैठी है। आरोपी चेतन काफी देर से उसका पीछा कर रहा था। मौका पाकर वह बस में चढ़ा और लावण्या के बगल वाली सीट पर बैठ गया। सहमी हुई लावण्या ने फोन पर अपने एक रिश्तेदार को घबराते हुए कहा, “मेरे बगल में कोई युवक आकर बैठ गया है…”। इसके बाद फोन कट गया। ये लावण्या की आवाज के आखिरी शब्द थे, जो उसने अपने अपनों से कहे थे।
जान बचाने के लिए चीखती-भागती रही लाडली
प्यार का प्रस्ताव ठुकराने की खौफनाक सजा: जब लावण्या ने चेतन के शादी या प्यार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो उसके सिर पर खून सवार हो गया। उसने बैग से एक बड़ा चाकू निकाला। डर से कांपती हुई लावण्या अपनी जान बचाने के लिए बस से नीचे उतरी और बेतहाशा भागने लगी। लेकिन हैवान बने चेतन ने उसे बस स्टैंड पर दौड़ाया और पकड़कर उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए। वह दर्द से चीखती रही, मदद की भीख मांगती रही, लेकिन किसी ने उसे नहीं बचाया। आखिरकार, लहूलुहान होकर उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
मदद के लिए नहीं उठे हाथ, कैमरे में कैद होता रहा मौत का तमाशा; अब वायरल वीडियो देख रो रहा परिवार
इंसानियत इस कदर मर चुकी है कि जब वह मासूम अपनी आखिरी सांसें गिन रही थी, तब वहां मौजूद लोग उसे बचाने के बजाय अपने मोबाइल फोन से इस हैवानियत का वीडियो बना रहे थे। आज वही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लावण्या के माता-पिता और परिवार के लिए यह वीडियो किसी कयामत से कम नहीं है, जिसमें उनकी लाडली तड़प-तड़प कर दम तोड़ रही है और लोग तमाशबीन बने खड़े हैं। पुलिस अब इसी वीडियो के सहारे आरोपी की तलाश कर रही है।
इंसाफ की गुहार लगा रहे बूढ़े माता-पिता
इस खौफनाक वारदात के बाद से इलाके में मातम और सन्नाटा पसरा हुआ है। लावण्या के पिता बालाप्पा गौड़ा और उनका परिवार पूरी तरह टूट चुका है। पुलिस अधीक्षक अरुण के. सहित पुलिस की तमाम टीमें फरार कातिल की तलाश में दबिश दे रही हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक बेटियां इस तरह के पागलपन और एकतरफा प्यार की सनक का शिकार होती रहेंगी? आखिर कब हमारी बेटियां सुरक्षित महसूस कर पाएंगी?