नई दिल्ली: मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल 2026 किसी बड़ी मुसीबत से कम साबित नहीं हो रहा है और इस पूरे संकट के केंद्र में हैं टीम के कप्तान हार्दिक पंड्या। पांच मैचों में चार करारी हार के बाद अब दिग्गजों का धैर्य जवाब देने लगा है। पंजाब किंग्स के खिलाफ घरेलू मैदान पर मिली शर्मनाक हार के बाद पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने हार्दिक की कप्तानी की धज्जियां उड़ा दी हैं।
MI का हाल बेहाल
आईपीएल की सबसे सफल टीमों में से एक मुंबई इंडियंस फिलहाल पॉइंट्स टेबल में नीचे से दूसरे स्थान पर यानी कि 9वें नंबर पर संघर्ष कर रही है। कप्तान के तौर पर हार्दिक पंड्या के फैसले और टीम का तालमेल पूरी तरह से बिखरा हुआ नजर आ रहा है। गुरुवार को वानखेड़े स्टेडियम में श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली पंजाब किंग्स ने मुंबई को उनके घर में ही रौंदकर सीजन की चौथी हार थमा दी।
मनोज तिवारी का तीखा हमला
क्रिकबज पर चर्चा के दौरान मनोज तिवारी ने हार्दिक पंड्या की नेतृत्व क्षमता पर कड़ा प्रहार किया। तिवारी का मानना है कि जब से हार्दिक ने मुंबई की कमान संभाली है, उनके फैसले मैदान पर औसत दर्जे के रहे हैं। उन्होंने तर्क दिया कि पंजाब के खिलाफ मैच में भी हार्दिक की गेंदबाजी रोटेशन और फील्ड सेट करने की रणनीति टीम के किसी काम नहीं आई। मनोज तिवारी ने कहा कि पांच बार की चैंपियन टीम से इस तरह के दिशाहीन प्रदर्शन की उम्मीद नहीं थी, और इसका सीधा असर हार्दिक के कप्तानी के अनुभव की कमी या दबाव न झेल पाने के रूप में दिख रहा है।
केवल एक जीत और हार का अंबार
इस सीजन में मुंबई इंडियंस की हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अब तक खेले गए 5 मैचों में से 4 मैच गंवाए हैं। मुंबई को इस सीजन में अब तक की इकलौती सफलता 29 मार्च को कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ वानखेड़े में मिली थी। पंजाब किंग्स के खिलाफ मिली ताजा हार ने मुंबई के प्लेऑफ की राह को अभी से कांटों भरा बना दिया है।
फैंस और दिग्गजों का फूटा गुस्सा
रोहित शर्मा की जगह हार्दिक पंड्या को कप्तान बनाए जाने के बाद से ही फैंस के बीच नाराजगी थी, लेकिन अब लगातार हार ने इस आग में घी का काम किया है। सोशल मीडिया पर भी हार्दिक को उनकी खराब नेतृत्व क्षमता और मैच के दौरान गलत समय पर गेंदबाजी करने के फैसलों के लिए ट्रोल किया जा रहा है। मनोज तिवारी जैसे पूर्व खिलाड़ियों का यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि मुंबई के खेमे में सब कुछ ठीक नहीं है।