नई दिल्ली। ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने तीन अलग-अलग मामलों में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन मामलों में पीड़ितों से कथित तौर पर 42 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई थी। नई गिरफ्तारियों के साथ इन मामलों में अब तक पकड़े गए आरोपियों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है। सीबीआई के मुताबिक, यह कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे राष्ट्रव्यापी अभियान ‘ऑपरेशन चक्र-6’ के तहत की गई है। अभियान का मुख्य उद्देश्य ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को डराकर ठगी करने वाले संगठित साइबर गिरोहों पर शिकंजा कसना है।
20 राज्यों में 89 ठिकानों पर छापेमारी
सीबीआई ने बताया कि तीनों मामलों की जांच के सिलसिले में देश के 20 राज्यों में 89 स्थानों पर छापेमारी की गई। इसके बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी कथित तौर पर ठगी की रकम हासिल करने, उसे अलग-अलग बैंक खातों में घुमाने और आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का काम करते थे। जांच में सामने आया है कि साइबर ठग रकम के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए कई बैंक खातों और लेनदेन की श्रृंखला का इस्तेमाल करते थे।
बैंक खातों के जरिए रकम को घुमाने का आरोप
सीबीआई प्रवक्ता के मुताबिक, मध्य प्रदेश के इटारसी निवासी संकेत बस्तवार और पंकज दामाडे ने कथित तौर पर बैंक खाते उपलब्ध कराए थे। इन खातों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए ठगी की रकम प्राप्त की गई और बाद में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी गई। वहीं, नई दिल्ली निवासी आरिफ उर्फ किंग भाई, हरीश पुरुषोत्तम यादव उर्फ हैरी और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी शशांक सिंह उर्फ रवि पर भी पीड़ित से रकम प्राप्त करने के लिए बैंक खाता उपलब्ध कराने और बाद में कई खातों के जरिए रकम को इधर-उधर करने का आरोप है।
मोबाइल में APK फाइल डालकर बैंक खाते पर रखते थे नजर
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर खाताधारक के मोबाइल फोन में एक दुर्भावनापूर्ण APK फाइल इंस्टॉल की थी। सीबीआई का आरोप है कि इस सॉफ्टवेयर के जरिए आरोपी बैंक से आने वाले SMS अलर्ट को रोक सकते थे और खाते का संचालन गुप्त रूप से कर सकते थे। एजेंसी के मुताबिक, जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे संगठित साइबर नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। जांचकर्ताओं को यह भी पता चल रहा है कि ठगी की रकम को नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों के बीच किस तरह ट्रांसफर किया जाता था।
तीन राज्यों के पीड़ितों को बनाया निशाना
सीबीआई की जांच में तीन प्रमुख मामलों का पता चला है, जिनमें पिलानी स्थित BITS, गुजरात और कर्नाटक के पीड़ित शामिल हैं। आरोप है कि साइबर ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को लंबे समय तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा और जांच के नाम पर उनसे भारी रकम ट्रांसफर कराई।
BITS पिलानी के पीड़ित से 7.67 करोड़ की ठगी
BITS पिलानी से जुड़े मामले में पीड़ित को कथित तौर पर करीब तीन महीने तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा गया। इस दौरान उससे 7.67 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है।
गुजरात में 19.24 करोड़ रुपये की ठगी
गुजरात के मामले में भी पीड़ित को कथित तौर पर करीब तीन महीने तक डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया गया। सीबीआई के अनुसार, इस मामले में पीड़ित से 19.24 करोड़ रुपये की रकम ठगी गई।
कर्नाटक में एक महीने तक बनाया डिजिटल अरेस्ट का शिकार
कर्नाटक के मामले में पीड़ित को कथित तौर पर करीब एक महीने तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। इस दौरान उससे 15.45 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का आरोप है।
पहले तीन आरोपी भी हो चुके हैं गिरफ्तार
सीबीआई ने बताया कि जांच के शुरुआती चरण में तलाशी अभियान के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें हरियाणा के आकाश पर अपने नाम से खोले गए खाते में कथित तौर पर 1.95 करोड़ रुपये प्राप्त करने और उसी दिन रकम को दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का आरोप है। वहीं, कोलकाता के राजा कर्मकार पर अपनी फर्म के खाते में कथित तौर पर 1.5 करोड़ रुपये की ठगी की रकम प्राप्त करने का आरोप है। ज्योति रानी पर भी अपने खाते में आई रकम का एक हिस्सा नकद निकालने और बाकी रकम दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का आरोप लगाया गया है।
CBI की जांच में सामने आ रहा पूरे नेटवर्क का कनेक्शन
सीबीआई का कहना है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जरिए होने वाली साइबर ठगी किसी एक व्यक्ति या खाते तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे संगठित नेटवर्क काम कर रहा है। जांच एजेंसी अब ठगी की रकम के पूरे मनी ट्रेल और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है।
नोट: ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का एक तरीका है, जिसमें ठग पुलिस, CBI, ED या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर पीड़ित को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाते हैं और वीडियो कॉल या फोन के जरिए उसे अपने निर्देशों का पालन करने के लिए मजबूर करते हैं।