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जंतर-मंतर पर बवाल : संसद मार्च से पहले बैरिकेडिंग तोड़ी, पुलिस का लाठीचार्ज; सीजेपी बोली- हमें कोई नहीं रोक सकता

नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित संसद मार्च से पहले सोमवार सुबह जंतर-मंतर पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और. . .

नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रस्तावित संसद मार्च से पहले सोमवार सुबह जंतर-मंतर पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई। भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया और इलाके में मजबूत बैरिकेडिंग की गई। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने पर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

मौके पर 10 हजार से अधिक प्रदर्शनकारी मौजूद थे। पुलिस द्वारा रास्ता रोके जाने के बाद कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की। इसके बाद स्थिति बिगड़ गई और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। मार्च सुबह 9 बजे शुरू होना था, लेकिन पुलिस कार्रवाई और बैरिकेडिंग के कारण इसमें देरी हुई।

सीजेपी फाउंडर बोले- हमें कोई नहीं रोक सकता

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण है और उन्हें संसद मार्च से कोई नहीं रोक सकता। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस का कहना है कि मार्च के लिए किसी तरह की अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए प्रदर्शनकारियों को संसद की ओर बढ़ने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

सरकार से बातचीत की कोशिश का दावा

सीजेपी के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि प्रशासन की ओर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि संगठन बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। उनके मुताबिक आगे का फैसला अब प्रशासन के हाथ में है।

23वें दिन भी अनशन पर सोनम वांगचुक, रखीं तीन शर्तें

23 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं।

  • सरकार शिक्षा व्यवस्था की खामियों और पेपर लीक की जिम्मेदारी स्वीकार करे।
  • CJP के प्रतिनिधिमंडल को संसद जाने की अनुमति मिले और सांसद मुद्दा संसद में उठाने का भरोसा दें।
  • यदि स्वास्थ्य कारणों से संसद जाना संभव न हो, तो विभिन्न दलों के सांसद सफदरजंग अस्पताल पहुंचकर यही आश्वासन दें।

सोशल मीडिया पर जारी किया संदेश

वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हुई नाकामियों की जिम्मेदारी स्वीकार करती है या सांसद इस मुद्दे को संसद में उठाने का भरोसा देते हैं, तो वह अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर देंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह सफदरजंग अस्पताल में “अवैध हिरासत” में हैं, जहां उनकी आवाजाही और संवाद की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है।

रातभर जंतर-मंतर पर डटे रहे छात्र और समर्थक

रविवार शाम से ही जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा और समर्थक जुटने लगे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह आंदोलन केवल छात्रों का नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और पेपर लीक के खिलाफ देशव्यापी अभियान है। इसी कारण उन्होंने पूरी रात धरना जारी रखा और इसे ‘निर्णायक रात’ बताया।

बिना राजनीतिक झंडों के प्रस्तावित था मार्च

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संसद मार्च में किसी राजनीतिक दल का झंडा नहीं ले जाया जाएगा। प्रतिभागी महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव आंबेडकर, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों की तस्वीरें, राष्ट्रीय प्रतीक और विभिन्न नारों वाली तख्तियां लेकर मार्च करने वाले थे। नीट से जुड़े आत्महत्या कर चुके कुछ छात्रों की तस्वीरें भी प्रदर्शन में शामिल किए जाने की बात कही गई।

दिल्ली पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि बिना अनुमति संसद की ओर किसी भी मार्च की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसे देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है और मजबूत बैरिकेडिंग की गई है।

डिटेंशन बसों और वाटर कैनन तैनात होने का दावा

प्रदर्शनकारियों का दावा है कि धरना स्थल के आसपास करीब 40 डिटेंशन बसें और छह से सात वाटर कैनन तैनात किए गए हैं। हालांकि पुलिस की ओर से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। संभावित कार्रवाई की आशंका को देखते हुए कई प्रदर्शनकारी मानव श्रृंखला बनाकर शांतिपूर्ण ढंग से धरने पर बैठे रहे।

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