नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र आज, सोमवार से शुरू हो रहा है। यह सत्र 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 25 दिनों के दौरान 19 बैठकें आयोजित की जाएंगी। सत्र के दौरान केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष नीट पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी, एथनॉल ब्लेंडिंग सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और हंगामे के आसार हैं।
सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
मानसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद भवन के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित करने की संभावना है। इस दौरान वे सरकार के विधायी एजेंडे और सत्र के महत्व पर अपनी बात रख सकते हैं।
सरकार पेश करेगी कई अहम विधेयक
केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के लिए अपना विधायी एजेंडा पहले ही जारी कर दिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि संसद के दोनों सचिवालयों द्वारा 16 जुलाई को बुलेटिन पार्ट-II में विधायी कार्यसूची प्रकाशित की जा चुकी है। सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी। राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ‘वंदेमातरम’ से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश कर सकते हैं।
विपक्ष के निशाने पर होंगे ये बड़े मुद्दे
इस बार विपक्ष सरकार को कई संवेदनशील मुद्दों पर घेरने की तैयारी में है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- नीट पेपर लीक मामला
- अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी का विवाद
- एथनॉल ब्लेंडिंग नीति
- अन्य जनहित और प्रशासनिक मुद्दे
इन विषयों को लेकर विपक्ष संसद के भीतर जोरदार विरोध प्रदर्शन और चर्चा की मांग कर सकता है।
बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में हुई चर्चा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और विधायी कार्यों के साथ-साथ महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दों पर चर्चा की। बैठक के दौरान ओम बिरला ने सभी दलों से रचनात्मक बहस, सार्थक भागीदारी और संसदीय गरिमा बनाए रखते हुए पूरे सहयोग की अपील की, ताकि सत्र सुचारु रूप से संचालित हो सके।
सर्वदलीय बैठक में 40 दलों के 58 नेता हुए शामिल
मानसून सत्र से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में संसद परिसर में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में मंत्रियों सहित 40 राजनीतिक दलों के कुल 58 नेताओं ने हिस्सा लिया। बैठक में सरकार और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई तथा संसद के सुचारु संचालन पर जोर दिया गया।
एनसीपीआई की संसद में होगी एंट्री
इस मानसून सत्र की एक बड़ी राजनीतिक विशेषता यह भी है कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) पहली बार संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगी। यह पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों द्वारा गठित की गई है, जिन्होंने बाद में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन किया।
सपा का विरोध मार्च पर अभी फैसला नहीं
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ सांसद राम गोपाल यादव ने विपक्ष के प्रस्तावित विरोध मार्च में शामिल होने के सवाल पर कहा कि अभी तक उनकी संसदीय पार्टी ने कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी का जो भी फैसला होगा, उसी के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी।
मनीष तिवारी ने दिया स्थगन प्रस्ताव
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) का नोटिस दिया है। उन्होंने नए दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के नियमों पर विस्तृत चर्चा की मांग की है। उनका कहना है कि कानून ऐसा होना चाहिए जो अवसरवादी राजनीतिक दल-बदल पर रोक लगाए, लेकिन वैचारिक मतभेद और लोकतांत्रिक असहमति के लिए पर्याप्त स्थान भी सुनिश्चित करे।
सुरजेवाला ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर चर्चा की मांग की
कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने राज्यसभा में अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे पर चर्चा कराने के लिए सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दिया है। विपक्ष इस मामले को लेकर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है।
हंगामेदार रहने के आसार
सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाएगा। ऐसे में संसद का यह मानसून सत्र राजनीतिक टकराव, तीखी बहस और कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के कारण बेहद अहम माना जा रहा है।