नई दिल्ली। भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने पहली बार पाकिस्तान स्थित कथित ISI हैंडलर शाहजाद भट्टी को लेकर थ्रेट असेसमेंट एडवाइजरी जारी की है। सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, एजेंसियों को आशंका है कि BRICS Summit 2026 के आसपास शाहजाद भट्टी से जुड़ा नेटवर्क दिल्ली और आसपास के इलाकों में कम तीव्रता वाले हमलों या अन्य व्यवधान पैदा करने वाली गतिविधियों को अंजाम देने का प्रयास कर सकता है।
स्थानीय मददगारों के जरिए रेकी और हथियार जुटाने की आशंका
एजेंसियां इस संभावना का भी आकलन कर रही हैं कि भट्टी का नेटवर्क स्थानीय लोगों की मदद लेकर संवेदनशील स्थानों की रेकी, हथियारों की खरीद और कमजोर ठिकानों की पहचान करने जैसी गतिविधियां कर सकता है।
संदिग्ध गतिविधियों पर बढ़ाई गई निगरानी
जारी एडवाइजरी में संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध आवाजाही, संभावित ऑनलाइन भर्ती, हथियार खरीदने के प्रयास और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की रेकी पर नजर बनाए हुए हैं।
जांच एजेंसियां लक्षित फायरिंग, ग्रेनेड हमले और अन्य प्रकार की बाधा पैदा करने वाली गतिविधियों की संभावना को भी ध्यान में रखकर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर में संदिग्ध स्थानीय संपर्क रडार पर
सुरक्षा एजेंसियों की नजर उन स्थानीय संपर्कों पर भी है, जिन्हें पाकिस्तान स्थित नेटवर्क कथित तौर पर सक्रिय कर सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे लोगों का इस्तेमाल रेकी, भर्ती, लॉजिस्टिक्स और हथियारों की व्यवस्था जैसे कामों में किए जाने की आशंका है।
राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों में संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
हालिया कार्रवाई के बाद भी नेटवर्क के दोबारा सक्रिय होने की चिंता
यह नया थ्रेट असेसमेंट ऐसे समय सामने आया है जब कुछ सप्ताह पहले भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने कई राज्यों में कथित ISI समर्थित शाहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया था। अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के बावजूद एजेंसियां नेटवर्क के बचे हुए सदस्यों या उसके समर्थकों के दोबारा सक्रिय होने की संभावना को लेकर सतर्क हैं।
BRICS Summit के मद्देनजर सुरक्षा तैयारियों पर फोकस
BRICS Summit 2026 के दौरान दिल्ली में सुरक्षा को लेकर पहले से व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां किसी भी छोटे स्तर के हमले या व्यवधान को गंभीरता से ले रही हैं।एजेंसियों का आकलन है कि ऐसी गतिविधियों का मकसद लोगों में डर पैदा करना, सुरक्षा बलों के संसाधनों को दूसरी दिशा में लगाना या कानून लागू करने वाली एजेंसियों की प्रतिक्रिया को परखना हो सकता है। गृह मंत्रालय (MHA) के अनुसार, स्वतंत्रता दिवस से पहले सुरक्षा एजेंसियों ने इस नेटवर्क के खिलाफ समन्वित अभियान चलाया था। 12 अगस्त को हुई इस कार्रवाई में 14 राज्यों से 253 लोगों को हिरासत में लिया गया था। अभियान खुफिया सूचनाओं के आधार पर राज्य पुलिस बलों के साथ समन्वय में चलाया गया।
14 राज्यों में चला था संयुक्त अभियान
गृह मंत्रालय के मुताबिक, कार्रवाई उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, कर्नाटक, गुजरात, बिहार, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल में की गई थी। MHA ने बताया था कि यह अभियान स्वतंत्रता दिवस के आसपास कथित तौर पर तैयार की जा रही गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से चलाया गया। सरकार ने इसे सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा बताया था।
IED, ग्रेनेड और हथियार बरामद होने का दावा
गृह मंत्रालय के अनुसार, अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने IED, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद किए थे। इसके अलावा कथित जासूसी गतिविधियों में इस्तेमाल किए जा रहे CCTV कैमरे भी बरामद किए गए थे। MHA के मुताबिक, शाहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से अधिक FIR दर्ज की जा चुकी हैं और 200 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुई हैं। मामलों में UAPA, भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट, NDPS एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट समेत कई कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।
MHA ने नेटवर्क को बताया ISI समर्थित आतंकी सिंडिकेट
गृह मंत्रालय ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क को पाकिस्तान स्थित और ISI समर्थित आतंकी सिंडिकेट बताया है। मंत्रालय के अनुसार, नेटवर्क भारत में ग्रेनेड, IED और पेट्रोल बम हमलों के अलावा लक्षित हत्याओं से भी जुड़ा रहा है। अधिकारियों का आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े लोगों ने स्थानीय संपर्कों को पुलिस, रक्षा प्रतिष्ठानों और धार्मिक स्थलों की रेकी करने के लिए पैसे दिए। निगरानी और कथित जासूसी के लिए CCTV कैमरे लगाने की गतिविधियों का भी आरोप लगाया गया है।
अभियान के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां क्यों सतर्क?
ताजा थ्रेट असेसमेंट से साफ है कि बड़े पैमाने पर हुई कार्रवाई के बाद भी सुरक्षा एजेंसियां नेटवर्क के बचे हुए सदस्यों और संभावित स्थानीय ऑपरेटिव को लेकर सतर्क हैं। अब एजेंसियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कहीं नेटवर्क से जुड़े स्थानीय लोग दोबारा सक्रिय होकर रेकी, भर्ती, लॉजिस्टिक्स या हथियारों की खरीद जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की कोशिश तो नहीं कर रहे हैं।