Home » एक्सक्लूसिव » उत्तर बंगाल की 54 सीटों पर महासंग्राम कल ! भाजपा बचाएगी किला या तृणमूल करेगी खेला, जाने 2019, 2021 और 2024 में कैसा था BJP का प्रदर्शन

उत्तर बंगाल की 54 सीटों पर महासंग्राम कल ! भाजपा बचाएगी किला या तृणमूल करेगी खेला, जाने 2019, 2021 और 2024 में कैसा था BJP का प्रदर्शन

डेस्क। उत्तर बंगाल- जहां 54 विधानसभा सीटें हैं- एक बार फिर पश्चिम बंगाल की सियासत का सबसे बड़ा रणक्षेत्र बनकर उभरा है। यहां की हर सीट पर सत्ता की सांसें अटकी हुई हैं, हर वोट जैसे किसी बड़ी कहानी का. . .

डेस्क। उत्तर बंगाल- जहां 54 विधानसभा सीटें हैं- एक बार फिर पश्चिम बंगाल की सियासत का सबसे बड़ा रणक्षेत्र बनकर उभरा है। यहां की हर सीट पर सत्ता की सांसें अटकी हुई हैं, हर वोट जैसे किसी बड़ी कहानी का हिस्सा बन चुका है। एक तरफ बीजेपी है, जो इसी इलाके की ताकत के दम पर राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने का सपना देखती आई है। यह क्षेत्र उसके लिए सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि उसके राजनीतिक उभार की रीढ़ रहा है। इसलिए पार्टी हर हाल में इस किले को बचाए रखना चाहती है। दूसरी ओर TMC है, जो बदले हुए समीकरणों और नए राजनीतिक माहौल के बीच अपनी खोई जमीन वापस पाने की जंग लड़ रही है। पार्टी के लिए यह सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि अपनी पकड़ और प्रतिष्ठा दोबारा साबित करने की लड़ाई है।
गांव-गांव में चर्चाएं तेज हैं, नेताओं की रैलियां गर्म हैं और जनता के बीच माहौल पूरी तरह चुनावी हो चुका है। उत्तर बंगाल अब सिर्फ एक क्षेत्र नहीं, बल्कि सत्ता की सबसे बड़ी कुंजी बन गया है- जहां जीतने वाला ही बंगाल की सियासत का असली सिकंदर कहलाएगा।

उत्तर बंगाल की 54 सीटों पर कब होगा चुनाव?

उत्तर बंगाल की सभी 54 सीटों पर वोटिंग 23 अप्रैल को पहले चरण में होगी। बीजेपी के लिए उत्तर बंगाल अब भी सबसे अहम इलाका है, जहां से वह दक्षिण बंगाल में TMC के दबदबे की भरपाई करना चाहती है। सत्ताधारी TMC के लिए यहां वापसी करना बेहद जरूरी है, ताकि वह बीजेपी की बढ़ती ताकत को रोक सके और विपक्ष को मिलने वाली रफ्तार को थाम सके।
यह इलाका चुनावी तौर पर काफी जटिल है- यहां पुराने वोट बैंक कमजोर पड़ रहे हैं और नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। यानी, जनता का रुझान बदल रहा है और मुकाबला पहले से ज्यादा दिलचस्प हो गया है।

BJP ने उत्तर बंगाल को बनाया अपना मजबूत गढ़

बीजेपी ने 2019 लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर बंगाल को अपना मजबूत गढ़ बना लिया था और 2021 विधानसभा चुनाव में भी इसे और मजबूत किया। लेकिन अब पार्टी को सत्ता विरोधी माहौल, अंदरूनी मतभेद और उम्मीदवारों के चयन को लेकर नाराजगी जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
दूसरी तरफ, TMC को भरोसा है कि उसने अपनी संगठनात्मक कमजोरियों को सुधार लिया है, अलग-अलग समाज के लोगों से दोबारा जुड़ाव बनाया है और जो जमीन पहले खो दी थी, उसे काफी हद तक वापस हासिल कर लिया है।

2019, 2021 और 2024 में भाजपा का मजबूत प्रदर्शन

उत्तर बंगाल में 2019, 2021 और 2024 के चुनावों में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी को बड़ा और गहरा झटका दिया था। यह इलाका 2011 और 2016 में तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ था जिससे भाजपा ने 2019 में तोड़ दिया था। 2011 में तृणमूल कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस पार्टी ने मिलकर इस इलाके कुल 54 सीटों में 33 सीटों पर जीत दर्ज़ किया था। इसमें कांग्रेस पार्टी 17 सीटों पर और तृणमूल कांग्रेस पार्टी 16 सीटों पर जीत दर्ज़ किया था। वही 2016 में तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस पार्टी से अलग होकर जन आंदोलन पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा और अपने सीटों की संख्या को 16 से बढाकर 24 कर लिया।

उत्तर बंगाल की राजनीति हर जिले में अलग रंग दिखाती है

उत्तर बंगाल की राजनीति हर जिले में अलग रंग दिखाती है। दार्जिलिंग, कालीमपोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा—इन आठ जिलों में मुकाबले का अंदाज भी अलग-अलग है। कहीं पहाड़ और चाय बागान हैं, तो कहीं राजबंशी इलाका और कहीं अल्पसंख्यक बहुल मैदान। हर जगह लोगों के मुद्दे, पहचान और पुरानी राजनीतिक सोच अलग-अलग तरीके से असर डाल रही है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अब उत्तर बंगाल में एकतरफा लहर नहीं रही। बीजेपी के पास अभी भी मजबूत आधार है, लेकिन मुकाबला 2021 के मुकाबले काफी कड़ा हो गया है।

पिछले चुनाव में किसे क्या मिला?

2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने यहां शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 में से 7 सीटें जीती थीं। 2021 विधानसभा चुनाव में भी उसने 54 में से 30 सीटें अपने नाम कीं, जबकि TMC को 24 सीटें मिलीं। 2024 में भी बीजेपी आगे रही, लेकिन थोड़ा कमजोर पड़ी- 8 में से 6 लोकसभा सीटें जीतीं और 31 विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाई।
इसी वजह से अब उत्तर बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। बीजेपी ने यहां 54 में से 48 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। उसे कूचबिहार और जलपाईगुड़ी के राजबंशी इलाकों, डुआर्स-तराई के चाय बागानों और दार्जिलिंग-कालीमपोंग के पहाड़ी क्षेत्रों में अपनी पकड़ पर भरोसा है।
पार्टी विकास के मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है- जैसे AIIMS, IIT, IIM और कैंसर अस्पताल बनाने का वादा, चाय बागान मजदूरों को जमीन के अधिकार और स्थानीय भाषाओं को मान्यता देना।
लेकिन बीजेपी के सामने चुनौतियां भी हैं। पहाड़ों में गोरखालैंड की मांग और मैदानों में कामतापुर या ग्रेटर कूचबिहार की मांग अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। पार्टी इन मुद्दों पर साफ रुख लेने से बच रही है, क्योंकि दक्षिण बंगाल में इसका असर पड़ सकता है।
TMC को लग रहा है कि बीजेपी की थोड़ी कमजोरी उसके लिए मौका है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अलीपुरद्वार और चाय बागान वाले इलाकों से अपना प्रचार शुरू किया, जिससे साफ है कि पार्टी अब उत्तर बंगाल पर ज्यादा ध्यान दे रही है।

TMC गठबंधन के साथ मैदान में उतरी

टीएमसी महिलाओं, अल्पसंख्यकों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों पर भरोसा कर रही है। साथ ही चाय बागान मजदूरों और राजबंशी समुदाय में भी अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पहाड़ों में उसने अनित थापा की पार्टी के साथ गठबंधन किया है, ताकि बीजेपी को टक्कर दी जा सके।
एक बड़ा मुद्दा वोटर लिस्ट में बदलाव भी है। कई जिलों में लाखों वोटरों के नाम हटाए गए हैं। बीजेपी का मानना है कि इससे उसे फायदा होगा, जबकि टीएमसी और कांग्रेस का आरोप है कि असली वोटरों के नाम काटे गए हैं।
कांग्रेस भी मालदा और दिनाजपुर इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और उसे उम्मीद है कि अल्पसंख्यक वोट उसके पक्ष में जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, उत्तर बंगाल में मुकाबला अब पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प और पेचीदा हो गया है। यहां अब सिर्फ एक मुद्दे पर चुनाव नहीं लड़ा जा रहा, बल्कि पहचान, विकास और स्थानीय समस्याएं सब मिलकर असर डाल रही हैं।
पहले यही इलाका बीजेपी के उभार की कहानी लिख चुका है, अब 23 अप्रैल को यह तय होगा कि क्या वह कहानी आगे बढ़ेगी या टीएमसी उसे बदलने में कामयाब होगी।

Web Stories
 
इन लोगों को नहीं खाना चाहिए मोरिंगा शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करने के लिए खाएं ये वेजेटेरियन फूड्स हल्दी का पानी पीने से दूर रहती हैं ये परेशानियां सकट चौथ व्रत पर भूल से भी न करें ये गलतियां बुध के गोचर से इन राशियों का शुरू होगा गोल्डन टाइम