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दिल्ली में गूंजा टॉलीवुड का नाम सुपरस्टार प्रसनजीत चटर्जी को मिला ‘पद्म श्री’, राष्ट्रपति भवन में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से हुए सम्मानित

कोलकाता/नई दिल्ली: बंगाली सिनेमा के ‘उद्योग’ कहे जाने वाले दिग्गज अभिनेता प्रसनजीत चटर्जी के प्रशंसकों और पूरे पश्चिम बंगाल के लिए सोमवार (25 मई) का दिन बेहद गौरवशाली रहा। राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित पहले ‘सिविल इनवेस्टीट्यूर सेरेमनी’. . .

कोलकाता/नई दिल्ली: बंगाली सिनेमा के ‘उद्योग’ कहे जाने वाले दिग्गज अभिनेता प्रसनजीत चटर्जी के प्रशंसकों और पूरे पश्चिम बंगाल के लिए सोमवार (25 मई) का दिन बेहद गौरवशाली रहा। राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित पहले ‘सिविल इनवेस्टीट्यूर सेरेमनी’ में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रसनजीत चटर्जी को कला के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए ‘पद्म श्री’ (Padma Shri) सम्मान से विभूषित किया। इस खास मौके पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित देश की कई बड़ी राजनीतिक व सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं।

पांच दशकों की तपस्या का मिला सम्मान

प्रसनजीत चटर्जी ने लगभग पांच दशकों से बंगाली फिल्म उद्योग को अपने कंधों पर संभाला है। कई पीढ़ियां बदलीं, टॉलीवुड की भाषा और दर्शकों की पसंद बदली, लेकिन प्रसनजीत चटर्जी हमेशा बंगाली सिनेमा के केंद्र बिंदु बने रहे। 350 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके प्रसनजीत ने एक समय जहां मुख्यधारा की व्यावसायिक (कमर्शियल) फिल्मों को जिंदा रखा, वहीं बाद में उन्होंने ‘ऑटोग्राफ’, ‘जातिस्मर’, ‘मोनेर मानुष’ और ‘गुमनामी’ जैसी फिल्मों में लीक से हटकर किरदार निभाकर खुद को एक बेहतरीन अभिनेता के रूप में स्थापित किया। सिनेमा प्रेमियों का मानना है कि यह सम्मान केवल एक अभिनेता का नहीं, बल्कि पूरे बंगाली सिनेमा का सम्मान है।

मनोरंजन जगत की इन बड़ी हस्तियों को भी मिला सम्मान

इस वर्ष केंद्र सरकार ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों की घोषणा की थी, जिसमें से पहले चरण के समारोह में 66 हस्तियों को सम्मानित किया गया। मनोरंजन जगत से कई और बड़े नाम भी इस सूची का हिस्सा रहे:

धर्मेंद्र (मरणोपरांत): हिंदी सिनेमा के ‘ही-मैन’ और ‘शोले’, ‘चुपके चुपके’ जैसी ऐतिहासिक फिल्मों के अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पद्म विभूषण’ से सम्मानित किया गया।

मामूट्टी: मलयालम सिनेमा के मेगास्टार मामूट्टी को ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया। (उन्हें 1998 में पद्म श्री भी मिल चुका है)।

अलका याग्निक: भारतीय संगीत जगत की दिग्गज प्लेबैक सिंगर अलका याग्निक को भी सुरों की दुनिया में उनके योगदान के लिए ‘पद्म भूषण’ सम्मान दिया गया।

आर. माधवन: फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ के अभिनेता व निर्देशक आर. माधवन को ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया।

सतीश शाह (मरणोपरांत): ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ और ‘मैं हूं ना’ जैसी फिल्मों में अपनी बेजोड़ कॉमिक टाइमिंग से लोगों को हंसाने वाले दिवंगत अभिनेता सतीश शाह को मरणोपरांत ‘पद्म श्री’ दिया गया।

अनिल कुमार रस्तोगी और अरविंद वैद्य: थिएटर और फिल्मों के वरिष्ठ अभिनेता अनिल कुमार रस्तोगी तथा ‘अनुपमा’ धारावाहिक के प्रसिद्ध ‘बाबूजी’ यानी अरविंद वैद्य को भी ‘पद्म श्री’ से सम्मानित किया गया।

नेपथ्य के 45 समाजसेवियों को भी मिला मान

1954 से शुरू हुए देश के इस प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान समारोह में इस बार केवल फिल्मी सितारे ही नहीं चमके, बल्कि देश के सुदूर इलाकों, आदिवासी समुदायों, दलित समाज और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए जीवन समर्पित करने वाले 45 गुमनाम समाजसेवियों को भी पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला कल्याण और बाल सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है।प्रसनजीत चटर्जी को जब राष्ट्रपति के हाथों पद्म श्री मिला, तो हर बंगाली सिनेमा प्रेमी का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। हालांकि, सोशल मीडिया पर फैंस का यह भी कहना है कि बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री को इतने सालों तक अकेले दम पर खींचने वाले इस ‘महाराज’ को यह सम्मान बहुत पहले ही मिल जाना चाहिए था।

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