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अमेरिका-कनाडा में फिर छिड़ा टैरिफ युद्ध, कनाडा ने 700 से ज्यादा अमेरिकी उत्पादों पर लगाया भारी शुल्क

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कनाडाई उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई की है। कनाडा. . .

ट्रंप के 50 फीसदी टैरिफ के ऐलान के बाद कनाडा का पलटवार, 27.6 अरब कनाडाई डॉलर के अमेरिकी सामान पर बढ़ा आयात शुल्क

ओटावा/वाशिंगटन। अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कनाडाई उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने के ऐलान के बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई की है। कनाडा सरकार ने अमेरिका से आयात होने वाले 700 से अधिक उत्पादों पर 15 से 50 फीसदी तक शुल्क लागू कर दिया है। कनाडा की ओर से लगाया गया नया टैरिफ 8 सितंबर से प्रभावी हो गया।

कनाडा सरकार के अनुसार, नए शुल्क के दायरे में आने वाले अमेरिकी उत्पादों का कुल व्यापार मूल्य करीब 27.6 अरब कनाडाई डॉलर है। सरकार का कहना है कि जवाबी शुल्क का उद्देश्य कनाडाई श्रमिकों, उत्पादकों और विनिर्माण क्षेत्र के हितों की रक्षा करना है।

ट्रंप के फैसले के बाद कनाडा का पलटवार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर अमेरिका के साथ व्यापार में भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कनाडाई सामान पर भारी शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार ने अमेरिकी उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लागू करने का फैसला किया। कनाडा के वित्त विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इन उपायों के जरिए घरेलू उद्योग और कामगारों को अनुचित व्यापारिक दबाव से बचाने की कोशिश की जा रही है।

700 से अधिक अमेरिकी उत्पाद टैरिफ के दायरे में

कनाडा के नए शुल्क का असर अमेरिका से आयात होने वाले सैकड़ों उत्पादों पर पड़ेगा। इन उत्पादों पर अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार 15 से 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया गया है।

कनाडा सरकार का कहना है कि यह कदम अमेरिकी व्यापार नीतियों के जवाब में उठाया गया है। दोनों देशों के बीच बढ़ता टैरिफ विवाद अब उत्तरी अमेरिका की सप्लाई चेन और कारोबार पर असर डालने की आशंका बढ़ा रहा है।

अमेरिका ने भी टैरिफ लागू करने की समयसीमा बताई

वहीं, व्हाइट हाउस ने कनाडा पर लगाए गए अमेरिकी आयात प्रतिबंधों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक नए आयात प्रतिबंध 29 सितंबर को पूर्वी अमेरिकी समयानुसार रात 12:01 बजे से लागू होंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने कहा है कि तय तारीख से पहले अमेरिका पहुंच चुके लेकिन अभी उपभोग के लिए मंजूरी नहीं पाए कनाडाई सामान पर पहले से लागू 50 फीसदी शुल्क जारी रहेगा।

अमेरिका बोला- सीमित व्यापार पर पड़ेगा असर

एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि नए उपायों का उद्देश्य कनाडा की जवाबी कार्रवाई का मुकाबला करना, अमेरिकी उत्पादन की रक्षा करना और दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा की स्थिति को फिर से संतुलित करना है। अधिकारी के मुताबिक, नए आयात प्रतिबंधों से कनाडा के साथ होने वाले व्यापार का अपेक्षाकृत सीमित हिस्सा प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा टैरिफ सूची में किए गए बदलावों से करीब 20 अरब डॉलर के व्यापार पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

कैसे शुरू हुआ अमेरिका-कनाडा का टैरिफ विवाद?

अमेरिका और कनाडा के बीच मौजूदा व्यापार विवाद की जड़ अमेरिकी प्रशासन की ओर से लगाए गए अतिरिक्त आयात शुल्क में है। ट्रंप प्रशासन ने 20 जुलाई को जारी घोषणाओं के जरिए टैरिफ एक्ट 1930 की धारा 338 के तहत अतिरिक्त शुल्क लगाने की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद कनाडा की ओर से विवादित व्यापारिक उपायों में बदलाव करने की प्रतिबद्धता जताई गई थी। हालांकि, व्हाइट हाउस का दावा है कि कनाडा इन उपायों को हटाने में विफल रहा। इसके बाद अमेरिका की ओर से दी गई छूट 22 अगस्त को समाप्त हो गई।

50 फीसदी तक शुल्क लगाने का प्रावधान

अमेरिकी प्रशासन ने टैरिफ एक्ट की धारा 338 का हवाला देते हुए अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार इस्तेमाल किया है। इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में विदेशी देशों के उत्पादों पर 50 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति मिलती है। अब अमेरिका और कनाडा दोनों की ओर से एक-दूसरे के उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने से दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव और बढ़ गया है।

कारोबार और उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है असर

अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार हैं। ऐसे में लंबे समय तक टैरिफ लागू रहने पर कंपनियों की लागत, आपूर्ति श्रृंखला और उपभोक्ता कीमतों पर असर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच बढ़ता टैरिफ विवाद केवल आयात-निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे विनिर्माण, कृषि और अन्य उद्योगों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। अब निगाह इस बात पर है कि दोनों सरकारें आगे बातचीत के जरिए इस व्यापारिक टकराव को कम करने की कोशिश करती हैं या टैरिफ की लड़ाई और लंबी खिंचती है।

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