मुंबई। अमेरिका के नए व्यापारिक फैसलों का असर शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। कारोबार शुरू होते ही निवेशकों में घबराहट फैल गई और दलाल स्ट्रीट पर जोरदार बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही बड़े नुकसान के साथ खुले, जबकि कई दिग्गज कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। बाजार खुलने के कुछ ही समय में निवेशकों की संपत्ति में करीब 3 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई।
खुलते ही धड़ाम हुए सेंसेक्स और निफ्टी
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स करीब 700 अंकों की गिरावट के साथ 75,691.32 के स्तर पर खुला। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 169.15 अंक टूटकर 23,700.45 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में बाजार का माहौल पूरी तरह नकारात्मक रहा। बिकवाली इतनी तेज रही कि लगभग 1,376 शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए, जबकि केवल 559 शेयरों में ही बढ़त दर्ज की गई। इससे साफ संकेत मिला कि लगभग सभी सेक्टरों में निवेशकों ने मुनाफावसूली और जोखिम कम करने का रास्ता अपनाया।
आखिर क्यों आई बाजार में इतनी बड़ी गिरावट?
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका की ओर से लिया गया नया व्यापारिक फैसला माना जा रहा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर ने ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत भारत सहित 16 अन्य देशों से आने वाले कुछ उत्पादों पर 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लगाने की घोषणा की है। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला उन उत्पादों पर लागू होगा, जिनके उत्पादन में कथित तौर पर जबरन मजदूरी (Forced Labor) का इस्तेमाल किया जाता है। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब पहले से लागू अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैरिफ समाप्त होने वाला था। ऐसे में नए टैरिफ की घोषणा ने वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा और विदेशी निवेशकों ने जोखिम वाले बाजारों से दूरी बनानी शुरू कर दी।
कच्चे तेल की कीमतों ने भी बढ़ाई चिंता
अमेरिकी व्यापारिक फैसलों के साथ-साथ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भी बाजार पर दबाव बनाया। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए क्रूड ऑयल महंगा होने से महंगाई, आयात बिल और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है। इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए कई सेक्टरों में जमकर बिकवाली की, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया।
इन सेक्टरों में सबसे ज्यादा बिकवाली
शुक्रवार के कारोबार में आईटी, ऑटो, एविएशन, बैंकिंग और मेटल सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। निवेशकों ने बड़ी कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली की, जिससे प्रमुख इंडेक्स तेजी से नीचे आ गए।
Infosys, IndiGo समेत कई दिग्गज शेयरों में बड़ी गिरावट
बाजार खुलते ही कई ब्लूचिप कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
- इंडिगो का शेयर करीब 1.93% टूटकर ₹4,927.15 पर पहुंच गया।
- एटरनल (पूर्व में जोमैटो की पैरेंट कंपनी) का शेयर 1.81% गिरकर ₹281.50 पर आ गया।
- भारती एयरटेल के शेयर में 1.55% की कमजोरी दर्ज की गई।
- इन्फोसिस का शेयर 1.17% टूटकर ₹1,039.45 पर पहुंच गया। हाल ही में कंपनी ने नए CEO-Designate की घोषणा की थी, लेकिन इसके बावजूद शेयर दबाव में रहा।
- अल्ट्राटेक सीमेंट में 1.17% की गिरावट रही।
- बजाज फाइनेंस का शेयर 1.09% फिसल गया।
- टाटा स्टील में 0.84% की कमजोरी दर्ज की गई।
- महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर 0.81% तक नीचे आ गए।
इन दिग्गज कंपनियों में आई गिरावट का असर पूरे बाजार की धारणा पर भी साफ दिखाई दिया।
बिकवाली के बीच कुछ शेयरों ने दिखाई मजबूती
जहां एक ओर अधिकांश शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, वहीं कुछ कंपनियों ने बाजार की कमजोरी के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया। एचसीएल टेक सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाले शेयरों में शामिल रहा। कंपनी का शेयर करीब 1.69% की बढ़त के साथ ₹1,265.90 पर कारोबार करता दिखाई दिया।
इसके अलावा—
- टेक महिंद्रा में 1.39% की तेजी रही।
- टीसीएस का शेयर 0.78% चढ़ा।
- सिप्ला ने भी मजबूती दिखाई।
- ओएनजीसी में खरीदारी देखने को मिली।
- अडानी एंटरप्राइजेज हरे निशान में कारोबार करता रहा।
- कोल इंडिया भी निफ्टी के प्रमुख गेनर्स में शामिल रहा।
निवेशकों के लिए आगे क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में अमेरिकी व्यापार नीति, वैश्विक टैरिफ विवाद, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है, तो भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वहीं, यदि व्यापारिक अनिश्चितता कम होती है और विदेशी निवेश दोबारा लौटता है, तो बाजार में स्थिरता देखने को मिल सकती है।