Authored by: उपमा सिंह
Produced by: स्वपनल सोनल
ऐक्टर : माधुरी दीक्षित,तृप्ति डिमरी,धारणा दुर्गा,रवि किशन,गीतांजलि कुलकर्णी,अरुणोदय सिंह,शारदुल भारद्वाज
श्रेणी : Hindi, Comedy, Drama, Thriller
डायरेक्टर : सुरेश त्रिवेणी
अवधि : 2 Hrs 7 Min
क्रिटिक रेटिंग
3.0/5
हमारे समाज में औरतों का चरित्र अक्सर उनके कपड़ों की साइज से तौला जाता है। जितने छोटे कपड़े, उतनी चरित्रहीन औरत। मर्दों को भी ऐसी औरतों के साथ कुछ भी करने-कहने का लाइसेंस मिल जाता है। आखिर कौन उनकी बात पर यकीन करेगा कि उनके साथ गलत हुआ? लोग तो यही कहेंगे ना कि इनके लक्षण ही ऐसे हैं, उसने खुद ही उकसाया होगा, फंसाया होगा। डायरेक्टर सुरेश त्रिवेणी की फिल्म ‘मां बहन’ समाज के इसी संकुचित सोच पर मनोरंजन की भारी-भरकम पोटली से जोरदार प्रहार की कोशिश करती है। फिल्म सीधे OTT प्लेटफॉर्म Netflix पर गुरुवार, 04 जून 2026 को रिलीज हुई है।
‘मां बहन’ की कहानी
फिल्म की कहानी के केंद्र में है आदर्श कॉलोनी की एक हॉट सिंगल मां रेखा (माधुरी दीक्षित) और उसकी दो बेटियां जया (तृप्ति डिमरी) और सुषमा (धारणा दुर्गा)। स्लीवलेस ब्लाउज पहनने वाली रेखा की खुद की बेटी भी उस पर उंगली उठाती है, मोहल्ले वालों का खैर कहना ही क्या! बला की खूबसूरत रेखा जब पहली बार स्लीवलेस ब्लाउज पहने अपने पति के साथ इस मोहल्ले में दाखिल हुई थी, तभी से सब उसे करैक्टर सर्टिफिकेट बांटने लगे थे। फिर पति के मौत के बाद तो अफवाहें यहां तक फैली कि खुद उसी ने अपने पति को मारकर अपने गेंदे के फूलों के नीचे गाड़ दिया है।
बेटियों को पालने के लिए साइबर कैफे से लेकर शराब की दुकान पर काम करने वाली रेखा के साथ ही उसकी बेटियां भी बदनाम हैं। बड़ी बेटी जया पर अपनी सहेली को देखने आए लड़के को फंसाने का अरोप है, तो इन्फ्लुएंसर सुषमा की पांच मिनट का ‘पप्पी विडियो’ सोशल मीडिया पर वायरल है। लेकिन कहानी में असल कांड तब होता है, जब उनके पड़ोसी चरित्र कुमार गुप्ता (रवि किशन) रेखा के घर में मरे (अधमरे पढ़ें) पाए जाते हैं। ऐसे में, ये ‘मां बहन’ की तिकड़ी इस मुसीबत से कैसे निकलती है? यह आपको फिल्म देखकर पता चलेगा।
‘मां बहन’ का ट्रेलर
‘मां बहन’ मूवी रिव्यू
फिल्म की कहानी डायरेक्टर सुरेश त्रिवेणी ने पूजा तोलानी के साथ मिलकर लिखी है। वह इससे पहले फिल्म ‘तुम्हारी सुलु’ में भी एक साधारण औरत को उसके पेशे की वजह से जज किए जाने के मुद्दे को हल्के-फुल्के अंदाज में, लेकिन बेहद असरदार तरीके से दिखा चुके हैं। इस बार, रेखा, जया और सुषमा की कहानी कहने के लिए भी उन्होंने कॉमेडी का दामन थामा है। लेकिन यहां माहौल कहीं ज्यादा लाउड और केयॉटिक (भरपूर भसड़ वाला) है।
हालांकि, स्क्रीनप्ले बीच में थोड़ा लड़खड़ाता है। गुप्ता जी का कफ सिरप के भरोसे दो दिन तक बेहोश रहना और मुख्य किरदारों का अपने साथ हुए गलत बर्तावों और जजमेंट के खिलाफ कभी आवाज न उठाकर बाद में विक्टिम मोड में चले जाना, अटपटा लगता है। हालांकि, बावजूद इसके मां-बहन की यह डिस्फंक्शन तिकड़ी भरपूर मनोरंजन करती है। डायलॉग खूब हंसाते हैं। वहीं, एक-एक करके खुलते राज बांधे रखते हैं। आखिर में यह फिल्म लोगों को औरतों के प्रति जजमेंटल होने से पहले सोचने पर भी मजबूर करती है।
फिल्म का एक बड़ा प्लस पॉइंट कलाकारों की दमदार अदाकारी है। माधुरी दीक्षित ने रेखा को एक अलग स्वैग और अदा बख्शी है, वहीं तृप्ति डिमरी की एक्टिंग बेहद सधी हुई है। ब्रेक डाउन वाले सीन में उनकी परफॉर्मेंस लाजवाब है। जबकि अपनी पहली ही फिल्म में धारणा दुर्गा ने पर्दे पर गजब आत्मविश्वास से भरी अदाकारी दिखाई है। उनकी कॉमिक टाइमिंग भी बढ़िया है।
बाकी सपोर्टिंग कास्ट में, गीतांजलि मिश्रा भी अपने सीन में छा जाती हैं। अरुणोदय सिंह, रवि किशन, शारदुल भारद्वाज भी अपने अभिनय से फिल्म को मजबूती देते हैं। तकनीकी रूप से फिल्म समृद्ध है और म्यूजिक भी माहौल के अनुरूप है।
क्यों देखें- भरपूर मनोरंजन के साथ-साथ एक ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं तो आपको सोचने पर भी मजबूर करे, तो ‘मां बहन’ आपके लिए है।