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होर्मुज खुलते ही भारत आ रहे 41 जहाज, 12 में सिर्फ खाद, 10 में क्रूड ऑयल, बचे हुए में है यह माल

नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही जैसे पूरी दुनिया के माथे से चिंता की लकीरें मिट गईं। कुछ दिन पहले तक जहां हालात ऐसे थे कि तेल सप्लाई रुकने का डर सता रहा था, अब वही रास्ता फिर से चालू. . .

नई दिल्ली। होर्मुज स्ट्रेट खुलते ही जैसे पूरी दुनिया के माथे से चिंता की लकीरें मिट गईं। कुछ दिन पहले तक जहां हालात ऐसे थे कि तेल सप्लाई रुकने का डर सता रहा था, अब वही रास्ता फिर से चालू हो गया है। इसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया पर दिखने लगा है। दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट बंद कर दिया था। दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल और एक तिहाई गैस इसी रास्ते से गुजरती है। हालत ये थी कि जैसे पूरी सप्लाई चेन की सांस अटक गई हो।

भारत आ रहे 41 जहाज

अब तस्वीर बदल गई है। होर्मुज खुलते ही भारत आने वाले 41 जहाज आगे बढ़ने को तैयार हैं। इन जहाजों में कच्चा तेल, एलपीजी, एलएनजी और खाद जैसी जरूरी चीजें भरी हुई हैं। इनमें 15 भारतीय और 26 विदेशी जहाज शामिल हैं। एक दर्जन से ज्यादा जहाज सिर्फ फर्टिलाइजर लेकर आ रहे हैं, जो खरीफ सीजन से पहले बेहद अहम हैं। भारतीय जहाजों की बात करें तो 10 में क्रूड ऑयल, 4 में एलपीजी और 3 में एलएनजी है। यानी ऊर्जा से लेकर खेती तक, हर सेक्टर को राहत मिलने वाली है।

कच्चे तेल के दाम धड़ाम

जैसे ही रास्ता खुला, तेल की कीमतों ने भी गोता लगा दिया। ब्रेंट क्रूड करीब 9 फीसदी टूटकर 90 डॉलर के आसपास बंद हुआ। कारोबार के दौरान तो ये 87.9 डॉलर तक पहुंच गया था। वहीं, WTI क्रूड भी 83 डॉलर के आसपास आ गया और इंट्रा-डे में 80 डॉलर तक फिसल गया। पिछले 9 दिनों में कच्चे तेल में 30 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है।

असली खेल ट्रांसपोर्ट और फ्रेट का

असली खेल तो ट्रांसपोर्ट और फ्रेट का है। जानकार मानते हैं कि होर्मुज खुलने से फ्रेट रेट घटेंगे, जिससे हर सेक्टर को फायदा होगा। अमृतसर की कंपनी डीआरआरके फूड्स के एमडी अमित मारवाह कहते हैं कि हालात सुधरते ही पश्चिम एशिया से मांग बढ़ेगी। उनका 18,000 टन बासमती चावल अभी तक बंदरगाहों पर अटका हुआ था, जो अब आगे जा सकेगा। पहले जेद्दा पोर्ट तक एक कंटेनर भेजने में करीब 700 डॉलर लगते थे, लेकिन तनाव के दौरान यही लागत 4-5 गुना तक बढ़ गई थी। अब इसमें राहत की उम्मीद है।

रास्ता छोटा, कारोबार बड़ा

निर्यातकों के संगठन फियो के डायरेक्टर जनरल अजय सहाय का कहना है कि अब सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि यूरोप तक सामान भेजना भी आसान हो जाएगा। यानी रास्ता छोटा तो खर्च कम और मुनाफा ज्यादा।

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