नई दिल्ली: भारत की मेजबानी में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत दुनिया के कई प्रमुख नेता हिस्सा ले रहे हैं। भारत ने 2026 में BRICS की अध्यक्षता संभाली है और इस साल की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखी गई है।
10 साल बाद एक मंच पर मोदी, पुतिन और जिनपिंग
इस BRICS सम्मेलन की सबसे बड़ी कूटनीतिक खासियत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की एक साथ मौजूदगी है। तीनों नेता इससे पहले 2016 के गोवा BRICS सम्मेलन में एक साथ नजर आए थे। शी जिनपिंग की भारत यात्रा भी खास है। वह 2019 के बाद पहली बार भारत पहुंचे हैं। ऐसे में मोदी-जिनपिंग की मुलाकात पर भारत-चीन संबंधों के लिहाज से विशेष नजर है।
BRICS में 11 सदस्य देश, 10 पार्टनर देश
विस्तार के बाद BRICS अब पहले की तुलना में काफी बड़ा समूह बन चुका है। इसके 11 पूर्ण सदस्य हैं:
- भारत
- चीन
- रूस
- ब्राजील
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- ईरान
- इथियोप संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा। हालांकि 2024 में सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिलेिया
- इंडोनेशिया
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
इसके अलावा 10 पार्टनर देश भी BRICS के साथ जुड़े हैं—बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।
दुनिया की करीब आधी आबादी BRICS में
BRICS की ताकत केवल सदस्य देशों की संख्या तक सीमित नहीं है। 11 सदस्य देशों में दुनिया की करीब 49% आबादी रहती है। यानी दुनिया के लगभग हर दो लोगों में से एक व्यक्ति BRICS देशों में रहता है। आर्थिक मोर्चे पर भी समूह का प्रभाव तेजी से बढ़ा है। PPP यानी Purchasing Power Parity (खरीद क्षमता) के आधार पर BRICS देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था दुनिया की लगभग 40% अर्थव्यवस्था के बराबर है। यह आंकड़ा इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे प्रभावशाली समूहों में शामिल करता है
PM मोदी की कई अहम द्विपक्षीय बैठकें
BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कर रहे हैं। शनिवार को उनके कार्यक्रम में प्रमुख मुलाकातें शामिल हैं:
- सुबह 10:00 बजे: इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली के साथ बैठक
- सुबह 10:30 बजे: मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ बैठक
- सुबह 11:00 बजे: अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बैठक
- सुबह 11:30 बजे: वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग के साथ बैठक
- शाम करीब 5:45 बजे: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक प्रस्तावित है।स्टैंडर्ड
पुतिन से मोदी की अहम बातचीत
BRICS सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात भी हो चुकी है। दोनों नेताओं ने राजनीति, अर्थव्यवस्था, रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल और लोगों के बीच संपर्क समेत कई क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। दोनों ने व्यापार और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। रूस-भारत संबंधों के साथ-साथ यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा और बदलती वैश्विक व्यवस्था जैसे मुद्दे भी BRICS के व्यापक विमर्श में महत्वपूर्ण रहेंगे।
चीन के साथ रिश्तों पर भी दुनिया की नजर
मोदी-जिनपिंग बैठक इस सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम हो सकती है। 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में लंबे समय तक तनाव रहा। हालांकि 2024 में सीमा पर सैनिकों की वापसी के बाद दोनों देशों के संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिले हैं। व्यापार और संपर्क भी दोबारा बढ़े हैं, लेकिन सीमा विवाद अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है ऐसे में दोनों नेताओं की बैठक में सीमा पर शांति, व्यापार, निवेश और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की उम्मीद है।
BRICS का दो दिवसीय कार्यक्रम
शनिवार को BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए कार्यक्रम शुरू हुआ। आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक इसमें बंद कमरे में बहुपक्षीय व्यवस्था पर चर्चा, Bharat Innovates Exhibition, फैमिली फोटो, संयुक्त वृक्षारोपण और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा आयोजित रात्रिभोज शामिल हैं। रविवार को पार्टनर देशों और आउटरीच नेताओं के साथ व्यापक सत्र होगा, जिसमें समावेशी वैश्विक विकास पर चर्चा होगी।
दुनिया की बदलती व्यवस्था में BRICS की बढ़ती भूमिका
BRICS अब केवल आर्थिक सहयोग का मंच नहीं रह गया है। समूह के विस्तार के साथ यह ग्लोबल साउथ की आवाज, बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था, वैश्विक संस्थाओं में सुधार और पश्चिम-केंद्रित आर्थिक व्यवस्था के विकल्प जैसे मुद्दों पर भी चर्चा का महत्वपूर्ण मंच बन रहा है। हालांकि समूह के भीतर चीन-भारत के मतभेद, अलग-अलग देशों के रणनीतिक हित और वैश्विक संघर्षों पर अलग-अलग दृष्टिकोण जैसी चुनौतियां भी हैं। इसके बावजूद 2026 का दिल्ली सम्मेलन यह दिखाता है कि BRICS वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में लगातार अधिक महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर रहा है।
भारत की कूटनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन
दिल्ली BRICS Summit 2026 भारत की कूटनीतिक ताकत का बड़ा प्रदर्शन है। एक ही मंच पर मोदी, पुतिन और जिनपिंग की मौजूदगी, BRICS का करीब आधी दुनिया की आबादी को प्रतिनिधित्व करना और लगभग 40% वैश्विक GDP से जुड़ना इस सम्मेलन को बेहद महत्वपूर्ण बनाता है। खास तौर पर मोदी-जिनपिंग बैठक और भारत-रूस संबंधों पर बातचीत के नतीजों पर दुनिया की नजर रहेगी।