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U-Turn लेंगे विदेशी निवेशक ? मिल सकती है बड़ी आजादी, कैपिटल गेन्स टैक्स हटाने की तैयारी में सरकार

मुंबई। इकोनॉमी को लेकर लगातार चिंताओं के बीच और विदेशी निवेश को लुभाने के मकसद से एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स को हटाने. . .

मुंबई। इकोनॉमी को लेकर लगातार चिंताओं के बीच और विदेशी निवेश को लुभाने के मकसद से एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स को हटाने का फैसला किया है। सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि इस प्रस्ताव को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
यह मंजूरी कैपिटल इनफ्लो को बढ़ावा देने, रुपये को मजबूती देने और ईरान में जारी जंग व कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के असर से अर्थव्यवस्था को बचाने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। कैबिनेट ने इन बदलावों को लागू करने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में संशोधन हेतु एक अध्यादेश को भी मंजूरी दी है। यह फैसला राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू होगा।

विदेशी निवेशकों के बाहर जाने से रोकने की कोशिश

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब भारत रिकॉर्ड स्तर पर विदेशी निवेशकों के बाहर जाने, रुपये पर दबाव और पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहे संघर्ष के कारण बढ़ती ऊर्जा लागत जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने सरकार को विदेशी बॉन्ड निवेश पर टैक्स कम करने की सिफारिश की थी।

अभी क्या है नियम?

मौजूदा नियमों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों को भारत में बॉन्ड निवेश पर शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म दोनों तरह के टैक्स देने पड़ते हैं। 12 महीने से अधिक समय तक बॉन्ड रखने पर 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है। वहीं, 12 महीने से कम समय में बेचने पर कैटेगरी के हिसाब से 30-40% तक का भारी शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होता है।
अब अध्यादेश के बाद सरकारी प्रतिभूतियों पर लगने वाला यह कैपिटल गेन टैक्स पूरी तरह से शून्य हो जाएगा। पहले ब्याज पर मिलने वाले ब्याज पर भी विदेशी निवेशकों को 20% विथहोल्डिंग टैक्स देना होता था। अब सरकार इस 20% टैक्स को भी आधा करने या इसमें ढील देने के लिए पैकेज पर काम कर रही है। यही वजह है कि कई विदेशी निवेशक भारतीय बॉन्ड मार्केट से दूरी बनाए रखते थे।

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अर्थव्यवस्था और रुपये पर असर

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग और वैश्विक अनिश्चितता के चलते इस साल अब तक भारतीय बाजारों से 2.47 लाख करोड़ की बिकवाली हाे चुकी है। इससे रुपया भी 96.96 के निचले स्तर पर चला गया है. टैक्स हटने से ग्लोबल लेवल पर बड़े फंड्स (सॉवरेन वेल्थ फंड्स और पेंशन फंड्स) भारत के डेट मार्केट में सालाना 10 बिलियन डॉलर से 30 बिलियन डॉलर (80000 करोड़ से लेकर 2.5 लाख करोड़) का निवेश ला सकते हैं। जब भारतीय बॉन्ड्स खरीदने के लिए विदेशी निवेशक बाजार में डॉलर लगाएंगे, तो डॉलर का इनफ्लो मजबूत होगा. इससे रुपये को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

बॉन्ड यील्ड में गिरावट

भारी खरीदारी से भारत सरकार के बॉन्ड्स की यील्ड (ब्याज दर) नीचे आएगी। बॉन्ड यील्ड गिरने का सीधा मतलब यही है कि सरकार को कर्ज उठाने के लिए कम ब्याज देना होगा, जिससे वित्तीय घाटे में भी गिरावट आएगी।

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