मालदा। पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बाढ़ और गंगा नदी के लगातार कटाव ने हजारों परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मानिकचक और रतुआ इलाके बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं। रतुआ की चार ग्राम पंचायतों में करीब 80 हजार लोगों के बाढ़ की चपेट में आने की बात सामने आई है। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम पंचायत कार्यालय तक में बाढ़ का पानी घुस गया है।
बांध टूटने के बाद 100 से ज्यादा गांवों पर संकट
भुटनी इलाके में बांध टूटने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई है। बताया जा रहा है कि इसके कारण 100 से ज्यादा गांव प्रभावित हुए हैं। दूसरी ओर, गंगा नदी का लगातार कटाव लोगों के लिए दोहरी मुसीबत बन गया है। कई परिवारों के घर और खेती की जमीन नदी में समा चुकी है। बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ लोगों के सामने सुरक्षित जगह पर जाने, भोजन और जरूरी सामान की व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
‘घर कट गया, अब कहां जाएं?’ महिला ने सुनाई दर्दनाक कहानी
भुटनी दियारा की एक पीड़ित महिला ने आईएएनएस से बातचीत में अपनी स्थिति बताते हुए कहा कि नदी के कटाव में उनका घर चला गया। अब उनके सामने रहने और खाने दोनों का संकट है।
महिला के मुताबिक, घर का सामान भी पानी में बह रहा है। उन्होंने बताया कि उनके चार बच्चे हैं और सुबह से परिवार ने कुछ नहीं खाया है। उनका आरोप है कि संकट के बावजूद स्थानीय जनप्रतिनिधि और पंचायत स्तर के लोग उनकी मदद के लिए नहीं पहुंचे।
चार बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे जिंदगी का डर
महिला ने प्रशासन से घर बनाने के लिए जमीन, रहने की सुरक्षित जगह और भोजन उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि परिवार के पास इस समय न रहने के लिए उचित जगह है और न ही पर्याप्त भोजन। बाढ़ और कटाव ने उनके जैसे कई परिवारों को बेघर होने के कगार पर पहुंचा दिया है। खेत और घर गंवा चुके लोगों के सामने अब आने वाले दिनों की चिंता भी बढ़ गई है।
बुजुर्ग का दावा- ढाई लाख लोग प्रभावित
एक बुजुर्ग स्थानीय निवासी ने बताया कि भुटनी दियारा के कई टोले और गांव नदी कटाव से प्रभावित हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में घरों में पानी घुस गया है और करीब ढाई लाख लोग किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं। हालांकि, प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर आधिकारिक आंकड़े अलग हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दियारा क्षेत्र में हर साल बाढ़ और कटाव से भारी नुकसान होता है।
हर साल करोड़ों खर्च, फिर भी नहीं थम रहा कटाव
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नदी कटाव से बचाव और बांधों की मरम्मत पर हर साल बड़ी रकम खर्च होती है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद कुछ समय के लिए राहत मिलती है, लेकिन अगली बार नदी का जलस्तर बढ़ते ही वही संकट फिर सामने खड़ा हो जाता है।
1972 से आज तक बदलती रहीं सरकारें, समस्या वही
बुजुर्ग स्थानीय निवासी ने कहा कि 1972 से लेकर 2026 तक कई सरकारें और मुख्यमंत्री आए, लेकिन दियारा क्षेत्र में बाढ़ और नदी कटाव की स्थायी समस्या का समाधान नहीं हो सका। उनका कहना था कि हर साल राहत और मरम्मत के उपाय किए जाते हैं, लेकिन नदी के कटाव से प्रभावित परिवारों के लिए दीर्घकालिक योजना की जरूरत है। स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल अस्थायी राहत के बजाय पुनर्वास और स्थायी कटावरोधी व्यवस्था पर काम किया जाए।
सड़क से स्वास्थ्य केंद्र तक पानी का असर
बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। कई सड़कों पर पानी भरने से आवागमन प्रभावित हुआ है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम पंचायत कार्यालय में भी पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सुविधा, खाद्य सामग्री और जरूरी सेवाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
सरकार ने मदद का भरोसा दिया
बाढ़ और कटाव से पैदा हुए हालात के बीच राज्य सरकार की ओर से प्रभावित लोगों को मदद का भरोसा दिया गया है। स्थानीय स्तर पर राहत पहुंचाने और प्रभावित परिवारों की स्थिति का जायजा लेने की जरूरत बढ़ गई है। फिलहाल मालदा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की सबसे बड़ी चिंता घर, भोजन और सुरक्षित ठिकाने की है। नदी का कटाव अगर इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में विस्थापन का संकट और गहरा सकता है।
‘कटाव’, हर साल उजड़ रहे गांव
मालदा की मौजूदा त्रासदी सिर्फ बाढ़ की कहानी नहीं है। यहां असली और लंबे समय से चली आ रही चुनौती गंगा का कटाव है। पानी उतर जाने के बाद भी कटाव से उजड़े परिवारों के लिए संकट खत्म नहीं होता। घर और जमीन गंवाने वाले परिवारों को फिर से बसाने की चुनौती बनी रहती है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों की मांग अब सिर्फ तत्काल राहत तक सीमित नहीं है। वे स्थायी तटबंध, पुनर्वास, सुरक्षित आवास और कटाव प्रभावित परिवारों के लिए दीर्घकालिक योजना चाहते हैं।