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विधानसभा में पहली बार एक साथ पेश हुईं 28 कैग रिपोर्ट, पश्चिम बंगाल के 8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज पर उठे सवाल

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में शनिवार को एक बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दा सामने आया, जब राज्य सरकार से जुड़ी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की कुल 28 रिपोर्ट एक साथ पेश की गईं। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता. . .

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा में शनिवार को एक बड़ा प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दा सामने आया, जब राज्य सरकार से जुड़ी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की कुल 28 रिपोर्ट एक साथ पेश की गईं। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा के पहले सत्र में ये रिपोर्ट सदन के पटल पर रखीं।
बताया गया कि पिछले कई वर्षों से CAG की महत्वपूर्ण रिपोर्ट विधानसभा में पेश नहीं की गई थीं। लंबित पड़ी इन सभी रिपोर्टों को एक साथ पेश किया गया, जिसके बाद राज्य की वित्तीय स्थिति और सरकारी योजनाओं पर खर्च को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

‘CAG रिपोर्ट पेश नहीं करना बड़ा संवैधानिक चूक’: वित्त मंत्री

विधानसभा में वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने लंबे समय तक CAG रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने इसे संवैधानिक प्रक्रिया में बड़ी कमी बताया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि संविधान में CAG रिपोर्ट का विशेष महत्व है और हर सरकार की जिम्मेदारी होती है कि वह इन रिपोर्टों को विधानसभा में पेश करे।
वित्त मंत्री ने कहा कि किसी ज्ञात या अज्ञात कारणों से पिछले कुछ वर्षों में ये रिपोर्ट सदन में नहीं रखी गईं, जो एक गंभीर संवैधानिक चूक है।

2021 से 2025 तक की ऑडिट रिपोर्ट शामिल

विधानसभा में पेश की गई 28 CAG रिपोर्टों में वर्ष 2021 से 2025 तक के अलग-अलग वित्तीय वर्षों के ऑडिट शामिल हैं। इन रिपोर्टों में राज्य सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं और विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई है।

मुख्य रिपोर्टों में शामिल हैं:

@ पंचायती राज संस्थाओं का ऑडिट
@ जन स्वास्थ्य ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा
@ आदिवासी क्षेत्रों में भूमि प्रबंधन
@ आंगनवाड़ी और ICDS सेवाओं का प्रदर्शन
@ जल प्रदूषण रोकने के लिए सरकारी प्रयास
@ समग्र शिक्षा अभियान की समीक्षा
@ राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट
@ वित्त विभाग से जुड़ी आर्थिक रिपोर्ट
इन रिपोर्टों में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, धन के इस्तेमाल और प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा की गई है।

8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कर्ज को लेकर सरकार पर सवाल

वित्त मंत्री ने राज्य की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर भी विधानसभा में चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार के कामकाज में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी कमी को जनता के सामने रखना सरकार का दायित्व है। स्वपन दासगुप्ता ने दावा किया कि CAG की रिपोर्टों से यह समझने में मदद मिलेगी कि पश्चिम बंगाल पर इतना बड़ा आर्थिक बोझ क्यों बढ़ा।
उन्होंने विधायकों को संबोधित करते हुए कहा कि इन रिपोर्टों का अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट हो सकता है कि राज्य का घाटा और वित्तीय दबाव किस वजह से बढ़ा है।

28 रिपोर्टों पर चर्चा के लिए बुलाया जा सकता है विशेष सत्र

एक साथ 28 रिपोर्ट पेश होने के बाद वित्त मंत्री ने कहा कि यह विधायकों के लिए एक बड़ा अध्ययन का विषय है। उन्होंने इसे विधानसभा के लिए महत्वपूर्ण ‘होमवर्क’ बताया। उन्होंने संकेत दिया कि इन CAG रिपोर्टों पर विस्तार से चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। वित्त मंत्री ने कहा कि ये रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण हैं और आने वाले समय में इनके हर पहलू पर चर्चा की जाएगी।

सरकार ने निभाया संवैधानिक दायित्व

अपने संबोधन के अंत में स्वपन दासगुप्ता ने कहा कि CAG रिपोर्टों को विधानसभा में रखना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि इन रिपोर्टों के माध्यम से सरकार के कामकाज, वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
अब इन 28 रिपोर्टों को लेकर विधानसभा में विस्तृत बहस की तैयारी शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि राज्य की आर्थिक स्थिति, कर्ज और सरकारी खर्च को लेकर आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।

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